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वारली पेंटिंग के बारे में जानिए जरूरी बातें, पारंपरिक कला है बहुत सुंदर
वारली पेंटिंग से जुड़ी जरूरी बातें

वारली पेंटिंग के बारे में जानिए जरूरी बातें, पारंपरिक कला है बहुत सुंदर

लेखन अंजली
Jan 04, 2026
05:15 pm

क्या है खबर?

महाराष्ट्र की पारंपरिक कला वारली को आदिवासी जनजाति द्वारा विकसित किया गया था। यह कला सफेद रंग की पेंटिंग से की जाती है, जो मिट्टी, लकड़ी और अन्य सामग्रियों से बनाई जाती हैं। वारली पेंटिंग में प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जाता है। इस कला में मानव, पशु, पक्षी और प्रकृति के विभिन्न पहलुओं को दर्शाया जाता है। आइए आज हम आपको इस पारंपरिक कला से जुड़ी कुछ जरूरी बातें बताते हैं।

#1

वारली पेंटिंग का इतिहास

वारली पेंटिंग का इतिहास बहुत पुराना है। यह कला आदिवासी जनजाति वारली द्वारा विकसित की गई थी, जो महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात के पहाड़ी क्षेत्रों में रहती है। वारली पेंटिंग का उपयोग आदिवासी जनजाति अपने धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में करते थे। इस कला का पहला प्रमाण 10वीं शताब्दी में मिला था। तब से लेकर अब तक वारली पेंटिंग का इस्तेमाल कई अवसरों पर किया जा रहा है।

#2

वारली पेंटिंग बनाने का तरीका

वारली पेंटिंग बनाने के लिए सफेद रंग का उपयोग किया जाता है, जो आमतौर पर चावल के आटे से बनाया जाता है। इस रंग को दीवारों पर ब्रश या उंगली से लगाया जाता है। वारली पेंटिंग में ज्यादातर मानव, पशु, पक्षी, पेड़-पौधे और प्राकृतिक तत्व शामिल होते हैं। इस कला में ज्यामितीय आकारों का उपयोग किया जाता है, जैसे गोल, त्रिकोण और चौकोर आदि। वारली पेंटिंग में प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जाता है।

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#3

वारली पेंटिंग का सांस्कृतिक महत्व

वारली पेंटिंग का सांस्कृतिक महत्व बहुत ज्यादा है। यह कला आदिवासी जनजाति की जीवनशैली, धार्मिक विश्वासों और परंपराओं को दर्शाती है। वारली पेंटिंग में नाच-गाना, विवाह, शिकार, खेती और त्योहारों जैसे विभिन्न पहलुओं को चित्रित किया जाता है। इस कला को देखकर आदिवासी जनजाति की संस्कृति और जीवनशैली को समझा जा सकता है। वारली पेंटिंग में उपयोग किए जाने वाले रंग भी प्राकृतिक होते हैं, जो पर्यावरण के अनुकूल होते हैं।

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#4

आधुनिक युग में वारली पेंटिंग का विकास

आधुनिक युग में वारली पेंटिंग ने नया मुकाम हासिल किया है। आजकल इसे घरों, होटलों, रेस्टोरेंट्स आदि सजाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा कई कलाकारों ने इसे आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके नया रूप दिया है। वारली पेंटिंग अब केवल आदिवासी जनजाति तक सीमित नहीं रही बल्कि पूरे देश-दुनिया में इसकी मांग बढ़ रही है। इस प्रकार वारली पेंटिंग एक अनोखी पारंपरिक कला है, जो भारतीय संस्कृति और इतिहास को संजोए हुए है।

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