क्या सोया चंक्स में अंडों से ज्यादा प्रोटीन होता है? जानिए इस दावे की सच्चाई
क्या है खबर?
भारत में रहने वाले शाकाहारी लोग अक्सर इस कश्मकश में रहते हैं कि प्रोटीन की जरूरत को कैसे पूरा किया जाए? इसके लिए उन्हें सबसे पहले अंडा खाने की सलाह दी जाती है। हालांकि, हाल ही में अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (ISKCON) कोलकाता के उपाध्यक्ष और प्रवक्ता राधा रमन दास ने दावा किया कि अंडों के मुकाबले सोया चंक्स में ज्यादा प्रोटीन होता है। आइए इस दावे की सच्चाई जानते हैं, ताकि आप सही निर्णय ले सकें।
मामला
पश्चिम बंगाल की सरकार के बड़े फैसले के बाद इस मुद्दे ने पकड़ा तूल
इस मुद्दे पर चर्चा उस वक्त बढ़ गई, जब पश्चिम बंगाल में नई चुनी हुई भाजपा सरकार ने मिड-डे मील में बच्चों को अंडे न देने का फैसला किया। उनके खाने में अंडे को सोया चंक्स, पनीर, दाल और अन्य शाकाहारी खाद्य पदार्थों से बदला जाएगा। PTI की एक रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल सरकार कोलकाता नगर निगम क्षेत्र के स्कूलों में पका हुआ मिड-डे मील उपलब्ध कराने के लिए ISKCON को शामिल करने की योजना बना रही है।
दावा
क्या है दावे की सच्चाई?
राधा रमन दास ने कहा, "जहां 100 ग्राम अंडे में 13 ग्राम प्रोटीन होता है, वहीं 100 ग्राम सोया चंक्स में 52-54 ग्राम प्रोटीन होता है।" ऐसे में यह जानना जरूरी है कि यह दावा स्वास्थ्य विशेषज्ञों के हिसाब से कितना सही है। स्वास्थ्य संबंधी अध्ययनों के अनुसार, सोया चंक्स में प्रति 100 ग्राम अंडे की तुलना में ज्यादा प्रोटीन होता है। हालांकि, अंडों में प्रोटीन की गुणवत्ता बेहतर होती है, जो शरीर में ज्यादा अच्छे से अवशोषित होता है।
तुलना
प्रोटीन के मामले में अंडा बनाम सोया चंक्स
एक अंडे में लगभग 6-7 ग्राम प्रोटीन होता है। ऐसे में 100 ग्राम अंडे (2 अंडे) खा कर आपको 13 ग्राम प्रोटीन मिल सकता है। वहीं, सोया चंक्स की समान मात्रा आपको 52 ग्राम प्रोटीन प्रदान करेगी। हालांकि, अंडों की तुलना में सोया चंक्स को पचाना थोड़ा कठिन होता है। सोया चंक्स प्रोटीन से भरपूर और सस्ता पौधे आधारित खाद्य पदार्थ है, जबकि अंडे विटामिन-B12 और कोलीन जैसे जरूरी माइक्रोन्यूट्रिएंट के साथ संतुलित पोषण देते हैं।
जरूरत
बच्चों की प्रोटीन की जरूरत को समझना है अहम
पश्चिम बंगाल सरकार के फैसले के मद्देनजर, बच्चों की प्रोटीन की जरूरत को समझना अहम हो जाता है। बच्चों की दैनिक प्रोटीन की जरूरत मुख्य रूप से उम्र, वजन और गतिविधि के स्तर पर निर्भर करती है। छोटे बच्चों को रोजाना औसतन 13 ग्राम, 4-8 साल के बच्चों को लगभग 19 ग्राम और बड़े बच्चों को औसतन 34 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है। इसके अलावा वजन के हिसाब से भी आंकड़े बदलते हैं।
निष्कर्ष
क्या है इस दावे का निष्कर्ष?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बच्चों की डाइट में केवल एक प्रोटीन स्त्रोत को शामिल करना काफी नहीं। उन्हें संतुलित डाइट देनी चाहिए, जिसमें सोया चंक्स, पनीर, दाल, फल, मेवे, डेयरी उत्पाद और सब्जियों का संगम हो। अगर आपका बच्चा शाकाहारी नहीं है तो उसे अंडे के साथ-साथ प्रोटीन के अन्य शाकाहारी स्त्रोत भी दें। इससे उन्हें सभी जरूरी पोषक तत्व मिल पाएंगे और उनका पाचन भी दुरुस्त रहेगा। हालांकि, केवल शाकाहारी स्त्रोत चुनना भी सही है।