जापान की पारंपरिक कुश्ती है सूमो, जानिए इससे जुड़ी कुछ खास बातें
क्या है खबर?
जापान में सूमो एक पारंपरिक और प्रसिद्ध खेल है। यह न केवल एक खेल है, बल्कि जापानी संस्कृति का अहम हिस्सा भी है। सूमो में 2 पहलवान एक घेरे में मुकाबला करते हैं और उनका लक्ष्य होता है प्रतिद्वंद्वी को बाहर धकेलना या गिराना। इस खेल की अपनी खास परंपराएं और नियम हैं। आइए आज हम आपको सूमो से जुड़ी जरूरी बातें बताते हैं, जिनके बारे में जानकर आप इस खेल को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे।
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सूमो की शुरुआत और इतिहास
सूमो की शुरुआत जापान के पुराने समय में हुई थी। इसे शुरू में धार्मिक कार्यक्रमों का हिस्सा माना जाता था। समय के साथ यह एक मुकाबले का खेल बन गया। 7वीं शताब्दी में सूमो को आधिकारिक रूप दिया गया और इसे योद्धा वर्ग द्वारा प्रायोजित किया गया। 17हवीं शताब्दी में इसे एक पेशेवर खेल के रूप में स्थापित किया गया, जिससे यह आज तक जारी परंपरा बन गया। इस खेल के विकास ने जापानी समाज में अहम भूमिका निभाई।
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सूमो की पारंपरिक वेशभूषा
सूमो पहलवानों की पारंपरिक वेशभूषा में खास बेल्ट पहनाई जाती है। सबसे ऊंचे दर्जे के पहलवान को विशेष प्रकार की बेल्ट पहनाई जाती है, जिसे 'योकोतोशु' कहा जाता है। इनकी खासियत इनका विशाल आकार और वजन होती है, जो इन्हें अन्य पहलवानों से अलग बनाती है। उनके कपड़े और बेल्ट भी बहुत खास होते हैं, जो उनकी शान को बढ़ाते हैं। इस वेशभूषा में पारंपरिक तत्व शामिल होते हैं, जो जापानी संस्कृति का हिस्सा हैं।
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सूमो रिंग और मुकाबला प्रक्रिया
सूमो रिंग को 'दोयो' कहा जाता है, जो मिट्टी से भरी होती है और जिसके चारों ओर एक घेरा होता है। मुकाबला 2 पहलवानों के बीच होता है, जिनका लक्ष्य प्रतिद्वंद्वी को घेरे से बाहर धकेलना होता है। मुकाबला शुरू होने से पहले दोनों पहलवान अपने हाथों पर मिट्टी लगाते हैं और फिर रिंग के केंद्र में आकर अपनी ताकत दिखाते हैं। हर मुकाबला 6 मिनट तक चलता है, लेकिन जल्दी खत्म होने पर एक मिनट का ब्रेक मिलता है।
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सूमो की ट्रेनिंग प्रक्रिया
सूमो पहलवानों की ट्रेनिंग बहुत सख्त होती है। उन्हें सुबह जल्दी उठकर कड़ी कसरत करनी पड़ता है, जिसमें दौड़ना, उठक-बैठक करना और वजन उठाना शामिल होता है। इसके अलावा उन्हें विशेष आहार भी दिया जाता है, जिसमें मांसाहारी भोजन शामिल होता है। सूमो पहलवानों को अपनी फिटनेस बनाए रखने के लिए नियमित रूप से अभ्यास करना पड़ता है, ताकि वे मुकाबलों के लिए तैयार रह सकें। उनकी ट्रेनिंग प्रक्रिया बहुत ही अनुशासित और कठिन होती है।
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सूमो से जुड़ी पारंपरिक रस्में और समारोह
सूमो से जुड़ी कई पारंपरिक रस्में और समारोह होते हैं, जो इस खेल को खास बनाते हैं। इनमें से एक रस्म है विशेष पेय का सेवन, जिसे जीतने वाले पहलवान को दिया जाता है। इसके अलावा विशेष समारोह भी आयोजित किए जाते हैं, जहां विजेता पहलवान को सम्मानित किया जाता है। इन रस्मों से सूमो की परंपरा और भी समृद्ध होती है। इस प्रकार सूमो एक ऐसा खेल है, जो जापानी संस्कृति और समाज का अहम हिस्सा है।