बच्चों की स्क्रीन टाइम की आदतों को सुधारने के लिए अपनाएं ये 5 तरीके
क्या है खबर?
बच्चों में स्क्रीन टाइम की आदतें बदलती जा रही हैं। कई माता-पिता इस बात को लेकर चिंतित रहते हैं कि उनका बच्चा ज्यादा समय स्क्रीन के सामने न बिताए। इसके लिए अक्सर घर में बहसें होती रहती हैं। आइए आज हम आपको कुछ ऐसे तरीके बताते हैं, जिन्हें अपनाकर आप बिना किसी बहस के अपने बच्चों को स्क्रीन टाइम कम करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं और उनकी आदतों में सुधार ला सकते हैं।
#1
समय तय करें
बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम का समय तय करना बहुत जरूरी है। इससे वे जानते हैं कि उन्हें कितनी देर तक स्क्रीन का उपयोग करना है।
उदाहरण के लिए, उन्हें बताएं कि सुबह 30 मिनट और शाम को 30 मिनट का उपयोग करना सही रहेगा। इससे उनका ध्यान अन्य गतिविधियों की ओर भी जाएगा और उनकी आंखों पर कम दबाव पड़ेगा।
इसके अलावा उनकी पढ़ाई और खेलने की आदतें भी प्रभावित नहीं होंगी।
#2
अन्य गतिविधियों का महत्व बताएं
बच्चों को यह बताना जरूरी है कि स्क्रीन टाइम के अलावा भी कई मजेदार और सीखने वाली गतिविधियां होती हैं। उन्हें किताबें पढ़ने, पेंटिंग करने, गाने गाने या बाहर खेलने जैसी गतिविधियों में शामिल करें।
इससे उनका ध्यान स्क्रीन से हटेगा और वे नई चीजें सीख सकेंगे।
इसके अलावा यह उन्हें रचनात्मकता और सामाजिकता का भी मौका देगा, जिससे उनका मानसिक विकास होगा और वे अधिक संतुलित जीवन जी सकेंगे।
#3
उदाहरण बनें
बच्चे अपने माता-पिता और बड़ों को देखकर बहुत कुछ सीखते हैं। अगर आप खुद भी स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण रखेंगे तो बच्चे भी आपकी आदतें अपनाएंगे।
अपने बच्चों के साथ समय बिताएं जब आप स्क्रीन का उपयोग न कर रहे हों और उन्हें दिखाएं कि असली दुनिया में भी कितना कुछ मजेदार और रोचक है।
इसके अलावा बच्चों को यह भी बताएं कि स्क्रीन टाइम का सीमित उपयोग ही उनके स्वास्थ्य के लिए बेहतर है।
#4
सकारात्मक प्रोत्साहन दें
जब आपका बच्चा तय समय तक ही स्क्रीन का उपयोग करेगा तो उसकी तारीफ करें और उसे सकारात्मक प्रोत्साहन दें।
यह उसे आगे भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करेगा। आप उसे छोटे-छोटे इनाम भी दे सकते हैं जैसे कि उसकी पसंदीदा किताब या खिलौना।
इसके अलावा उसे यह भी बताएं कि उसने कितनी अच्छी आदत डाली है और यह उसके स्वास्थ्य के लिए कितना फायदेमंद है। इससे वह अपनी इस नई आदत को बनाए रखने में प्रेरित रहेगा।
#5
धैर्य रखें
बच्चों की आदतें बदलना आसान नहीं होता इसलिए धैर्य रखना बहुत जरूरी है। शुरुआत में कुछ मुश्किलें आ सकती हैं लेकिन धीरे-धीरे सब कुछ सामान्य हो जाएगा। बच्चों को समझाने का तरीका अपनाएं और उन्हें सही दिशा में मार्गदर्शन दें।
अगर वे कभी-कभी गलती कर देते हैं तो गुस्सा करने की बजाय उन्हें समझाएं कि वे अगली बार कैसे बेहतर कर सकते हैं।