मानसून के दौरान भारत के इन घास के मैदानों की यात्रा बन सकती है यादगार
क्या है खबर?
घास के मैदानों की हरियाली मानसून के दौरान और भी बढ़ जाती है। इस दौरान ये जगहें पर्यटकों को अपने आकर्षण से लुभाती हैं। मानसून में यहां की हरियाली और ठंडी हवा एक अलग ही अनुभव देती है। अगर आप प्रकृति प्रेमी हैं और शांत वातावरण में समय बिताना चाहते हैं तो ये घास के मैदान आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकते हैं। आइए कुछ ऐसी जगहों के बारे में जानते हैं।
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कास पठार, महाराष्ट्र
कास पठार महाराष्ट्र के सतारा जिले में स्थित एक खूबसूरत घास का मैदान है। यह यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त है। मानसून के दौरान यहां फूलों की बहार होती है, जो इसे और भी आकर्षक बनाती है। यहां पर आप पहाड़ियों पर चढ़ाई कर सकते हैं और आसपास की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद ले सकते हैं। इसके अलावा यहां की ठंडी हवा और शांत माहौल आपको एक अलग ही अनुभव देगा।
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शिलॉन्ग, मेघालय
मेघालय में स्थित शिलॉन्ग भी अपने घास के मैदानों के लिए जाना जाता है। यहां मानसून के दौरान हरियाली अपने चरम पर होती है, जिससे यह जगह और भी खूबसूरत लगती है। शिलॉन्ग में आप पहाड़ियों पर चढ़ाई कर सकते हैं या फिर बस घूमते हुए इस प्राकृतिक सुंदरता का आनंद ले सकते हैं। यहां की ठंडी हवा और शांत माहौल आपको एक अलग ही अनुभव देगा, जो आपके मन को शांति देगा।
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मावफलांग, मेघालय
मेघालय में ही स्थित मावफलांग अपने घास के मैदानों के लिए मशहूर है। यह जगह अपने साफ-सुथरे वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता के कारण पर्यटकों को आकर्षित करती है। मानसून के दौरान यहां की हरियाली और ठंडी हवा आपको सुकून का अनुभव कराएंगी। मावफलांग में आप परिवार के साथ पिकनिक मना सकते हैं या फिर बस घूमते हुए इस प्राकृतिक सुंदरता का आनंद ले सकते हैं।
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मावलिनोंग गांव, मेघालय
मावलिनोंग गांव को 'एशिया का सबसे साफ-सुथरा गांव' भी कहा जाता है। यह गांव समुद्र तल से लगभग 1,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और यहां की हरियाली बहुत सुंदर लगती है। मानसून के दौरान यहां की हरियाली और ठंडी हवा आपको मंत्रमुग्ध कर देगी। इस गांव में प्राकृतिक झरने, जड़ से बने पुल और साफ-सुथरे रास्ते देखने को मिलते हैं। यहां की शांति और प्राकृतिक सुंदरता आपको एक अलग ही अनुभव प्रदान करती है।