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वायु प्रदूषण से बढ़ रहा आत्महत्या का जोखिम? नए शोध में चौंकाने वाले खुलासे
वायु प्रदूषण और आत्महत्या के जोखिम के बीच संबंध का खुलासा

वायु प्रदूषण से बढ़ रहा आत्महत्या का जोखिम? नए शोध में चौंकाने वाले खुलासे

लेखन अंजली
Sep 16, 2026
04:32 pm

क्या है खबर?

यह तो सब जानते हैं कि वायु प्रदूषण का हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है, लेकिन क्या इसका संबंध आत्महत्या के जोखिमों से भी जुड़ा होता है? क्वींस यूनिवर्सिटी बेलफास्ट के वैज्ञानिकों ने इस बात की जांच की कि क्या वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, प्रकाश प्रदूषण और जल प्रदूषण आत्महत्या से होने वाली मौत और आत्महत्या से जुड़े व्यवहारों के जोखिम पर असर डाल सकता है। आइए इस शोध के बारे में जानते हैं।

संबंध

वायु और ध्वनि प्रदूषण का आत्महत्या के जोखिमों से मिला संबंध

जर्नल ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड कम्यूनिटी हेल्थ में प्रकाशित इस शोध के शोधकर्ताओं ने बताया कि 29 शोध के मेटा-एनालिसिस से पता चला कि हवा में मौजूद कणों और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड के संपर्क में आने से आत्महत्या की कोशिश और आत्महत्या के विचारों का जोखिम बढ़ जाता है।

इसके अतिरिक्त 16 शोध के एनालिसिस से संकेत मिला कि हवा को प्रदूषित करने वाले कुछ अन्य तत्व जैसे सल्फर डाइऑक्साइड आदि और ध्वनि प्रदूषण भी आत्महत्या के ज्यादा जोखिम से जुड़े थे।

प्रयास

आत्महत्या की रोकथाम के लिए करने चाहिए प्रयास

शोध के लेखकों ने कहा कि इस शोध के नतीजे बताते हैं कि आत्महत्या रोकने की रणनीतियों में पर्यावरण प्रदूषण पर भी विचार किया जाना चाहिए और आत्महत्या की रोकथाम को सार्वजनिक स्वास्थ्य के मुद्दे के तौर पर भी देखा जाना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा, "ये नतीजे इस बात पर जोर देते हैं कि आत्महत्या रोकने की कोशिशों में पर्यावरण से जुड़े जोखिमों को ऐसे कारकों के तौर पर पहचानना जरूरी है, जिन्हें बदला या कम किया जा सकता है।"

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आलोचना

कुछ विशेषज्ञों ने इस शोध को लेकर की आलोचना

कुछ आलोचना ने इस शोध के नतीजों को लेकर सावधानी बरतने की बात कही है।

समैरिटंस नाम के अंतरराष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संगठन में सीनियर रिसर्च और एविडेंस मैनेजर डॉक्टर जेस मूडी ने कहा, "आत्महत्या के कारणों को समझना कठिन है।"

रॉयल कॉलेज ऑफ साइकियाट्रिस्ट्स में जनरल एडल्ट फैकल्टी के चेयरमैन डॉक्टर जॉन वैन नीकेर्क ने कहा कि इस शोध से साबित नहीं होता कि वायु प्रदूषण के कारण आत्महत्या के विचार आते हैं या आत्महत्या की कोशिश की जाती है।

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आंकड़ा

आत्महत्या से जान गंवाने वालों संख्या है आश्चर्यजनक

डॉक्टर जॉन ने आगे कहा कि इस शोध के नतीजों को यह सुझाव देने के लिए नहीं देखा जाना चाहिए कि प्रदूषण कम करना ही आत्महत्या रोकने का एकमात्र उपाय हो सकता है।

इस शोध में ऐसे कारण मिले हैं, जो आत्महत्या के बढ़ते जोखिम से जुड़े हैं, लेकिन यह दावा करने के लिए और शोध की जरूरत है।

बता दें कि दुनियाभर में हर साल 7 लाख से ज्यादा लोग आत्महत्या से जान गंवाते हैं।

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