मलाइका अरोड़ा करती हैं ये 5 तरह के प्राणायाम, आप भी बनाएं दिनचर्या की हिस्सा
क्या है खबर?
मलाइका अरोड़ा का फिट शरीर देखकर लगता है मानो वह अभी महज 25 साल की ही हैं। इसका श्रेय योग को जाता है, जो सालों से उनकी जीवनशैली का अहम हिस्सा रहा है। वह अक्सर सोशल मीडिया के जरिए अपने प्रशंसकों को अलग-अलग प्रकार के योगासनों के फायदे बताया करती हैं। अब उन्होंने एक नया वीडियो साझा किया है, जिसमें वह 5 तरह के प्राणायाम करने की सलाह दे रही हैं। प्राणायाम सांस पर केंद्रित योग होता है।
#1
भस्त्रिका
मलाइका वीडियो में सबसे पहले भस्त्रिका करती नजर आती हैं। इसमें तेजी से और शक्तिशाली ढंग से सांस अंदर ली जाती है और छोड़ी जाती है। इसके लिए कमर, गर्दन और पीठ को सीधा रखें और पालथी मारकर बैठ जाएं। दोनों नासिकाओं से आवाज करते हुए जल्दी-जल्दी सांस अंदर लें और बाहर छोड़ें। धीरे-धीरे करके सांस लेने की गति को बढ़ाते जाएं। भस्त्रिका करने से ऊर्जा बढ़ती है और चयापचय भी मजबूत रहता है।
#2
कपालभाति
कपालभाति सबसे प्रसिद्ध प्राणायाम है, जिसका मतलब होता है 'खोपड़ी को चमकना'। इससे ही साफ हो जाता है कि यह प्राणायाम मन को शांत करता है और चेहरे की रौनक बढ़ा देता है। इसके लिए सीधे और ध्यान की मुद्रा में बैठ जाएं। एक गहरी सांस लें और उसे छोड़ते हुए पेट को तेजी से अंदर की ओर खींचें। इस प्रक्रिया को कई सत्रों में कम से कम 20 से 30 बार करें।
#3
अनुलोम-विलोम
मलाइका वीडियो में अनुलोम-विलोम करती भी नजर आती हैं। इसमें एक नासिका से सांस लेकर उसे दूसरी से छोड़ना होता है। इसके दौरान बारी-बारी से दोनों नासिकाओं का उपयोग किया जाता है। इसके लिए दाहिने अंगूठे से अपनी दाहिनी नाक बंद करें। इस दौरान अपनी बाईं नासिका से गहरी सांस लें। इसके बाद अपनी अनामिका उंगली से बाईं नाक बंद करें और दाहिनी नाक से सांस लें। इस प्राणायाम को 10 मिनट तक करें।
#4
भ्रामरी
भ्रामरी एक खास तरह का प्राणायाम है, जिसका मतलब होता है 'भौंरा'। इसके दौरान सांस छोड़ते समय भौंरे की गुंजन जैसी आवाज निकाली जाती है। इसके लिए ध्यान की मुद्रा में बैठें और एक गहरी सांस लें। अब सांस छोड़ते समय अपने मुंह से एक भीनी गुंजन की आवाज निकालें। इसे करने से एकाग्रता बढ़ती है और तनाव कम करने में मदद मिलती है। इसकी मदद से याददाश्त भी बेहतर होती है।
#5
उद्गीथ
उद्गीथ प्राणायाम ॐ के उच्चारण पर आधारित प्राणायाम है, जो सांस और ध्वनि को मिलाता है। इसके लिए सीधे बैठ जाएं और गहरी सांस भरें। सांस छोड़ते समय तब तक ॐ बोलें जब तक सांस टूटने न लगे। इस दौरान अपने शरीर के कंपन पर ध्यान केंद्रित करें। इस प्राणायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाने से मन और शरीर के बीच का संतुलन मजबूत होता है। इससे तनाव भी कम होता है और एकाग्रता बेहतर होती है।