मिस्र के 5 पारंपरिक पेय, जो होते हैं स्वादिष्ट और सेहत के लिए भी फायदेमंद
क्या है खबर?
मिस्र के पारंपरिक पेय न केवल स्वादिष्ट हैं, बल्कि सेहत के लिए भी अच्छे हैं। ये पेय स्थानीय संस्कृति और परंपराओं का अहम हिस्सा हैं। इनका सेवन खास अवसरों और समारोहों में किया जाता है। यहां के लोग और पर्यटक इन पेयों का आनंद लेते हैं और इनके फायदों को भी मानते हैं। आइए आज हम आपको कुछ ऐसे पेय के बारे में बताते हैं, जो मिस्र में काफी लोकप्रिय हैं।
#1
करकदेह
करकदेह मिस्र में गर्मी के दौरान पिया जाने वाला पेय है, जो लाल रंग का होता है। इसका लाल रंग इसमें शामिल होने वाले गुड़हल के फूलों से आता है, जिस वजह से हिंदी में इसे गुड़हल की चाय कहा जाता है। यह सूखे गुड़हल के फूलों की पंखुड़ियों से बना एक पारंपरिक पेय है, जो अपने खट्टे स्वाद के लिए जाना जाता है। इसे गर्म या बर्फ के साथ ठंडा, दोनों तरह से पिया जा सकता है।
#2
ताम्र हिंदी
ताम्र हिंदी एक पारंपरिक और ताजगी देने वाला खट्टा-मीठा पेय है, जिसे खट्टी-मीठी इमली से तैयार किया जाता है। अरबी में 'ताम्र हिंदी' का मतलब होता है 'भारतीय खजूर', जिसे हम साधारण भाषा में इमली कहते हैं। यह पेय मिस्र में रमजान के दौरान रोजा खोलने के लिए सबसे ज्यादा पिया जाता है। इसे बनाने के लिए चीनी, ठंडा पानी, इमली का गूदा और गुलाब का अर्क मिलाया जाता है।
#3
असब
अगर आपको गन्ने का जूस पसंद आता है तो आपको एक बार असब जरूर पी कर देखना चाहिए। यह मिस्र का पारंपरिक गन्ने का जूस होता है, जिसे गर्मी में पीने से शरीर पूरी तरह से तारो ताजा हो जाता है। यह पेय भी ठीक उसी तरह स्टाल्स पर तैयार किया जाता है, जैसे भारत में बनता है। इसे परोसते समय इसके ऊपर जो झाग की मोटी परत आती है, उसे असब पेय का सबसे खास हिस्सा माना जाता है।
#4
अहवा
कॉफी प्रेमी हैं तो मिस्र की पारंपरिक कॉफी अहवा का स्वाद चखना तो बनता ही है। अरबी भाषा में 'अहवा' का मतलब 'कॉफी' ही होता है। इसे एक छोटे से मेटल के बर्तन में बनाया जाता है, जिसे 'इबरीक' या 'जेजवा' कहते हैं। इसमें बारीक पिसी हुई कॉफी, चीनी और पानी डालकर उबाला जाता है। इसे छाने बिना सीधे ग्लास में डाला जाता है, जिससे कॉफी का गाढ़ा हिस्सा निचले भाग में बैठ जाता है।
#5
शे
चाय ऐसा पेय है, जो दुनिया के हर हिस्से में पिया जाता है। मिस्र में भी इसका आनंद लिया जाता है, जिसे शे कहते हैं। मिस्र में 2 तरह की चाय पी जाती हैं, जिनमें शे बिल-नाना यानि पुदीने की चाय और शे के-हेरी यानि काली चाय शामिल हैं। शे बिल-नाना को चाय पत्ती, हरी चाय, पुदीने की पत्ती को पानी से बनाया जाता है। शे के-हेरी एक कड़क काली चाय होती है, जिसमें ढेर सारी चीनी डाली जाती है।