70 साल की उम्र तक दिमाग को तेज रखेंगे ये 5 शौक, आज ही अपनाएं
क्या है खबर?
70 साल की उम्र तक आते-आते दिमाग कमजोर होने लगता है और चीजों को याद रख पाना मुश्किल होता है। ऐसे में काम आते हैं कुछ पुराने रचनात्कमक शौक, जिन्होनें जवानी के दिनों को खुशहाल बनाया होता है। कई अध्ययन बताते हैं कि गाने-बजाने जैसे कुछ शौक दिमाग को तेज करने में मदद कर सकते हैं। ये दिमाग की तंत्रिका कोशिकाओं को सक्रीय करते हैं, जिससे 70 की उम्र तक भी दिमाग तेज रहता है। आइए इनके बारे में जानें।
#1
नई भाषाएं सीखना
कुछ लोगों को नई-नई भाषाएं सीखने का शौक होता है। यह न केवल संवाद और नई जगहों की यात्रा के दौरान उपयोगी साबित होता है, बल्कि बुढ़ापे तक दिमाग तेज रखता है। जब आप नई भाषा सीखते हैं तो आपके दिमाग में बेहतर कार्यकारी नियंत्रण प्रणाली विकसित होती है। इससे चीजों पर ध्यान लगाने और सभी कामों को कुशलता से करने में मदद मिलती है। इससे आपका दिमाग ज्यादा चीजें याद रखना सीखता है और उन्हें कभी भूलता नहीं है।
#2
संगीत वाद्य यंत्र बजाना
कोई संगीत वाद्य यंत्र बजाना याददाश्त और समन्वय को बढ़ा सकता है। वाद्य यंत्र बजाने की प्रक्रिया एक साथ दिमाग के कई हिस्सों को सक्रीय करती है। इस शौक के लिए सुनने की क्षमता, मोटर कौशल, याददाश्त और भावनात्मक समझ के बीच तालमेल बैठाने की जरूरत होती है। ऐसे में लाजमी है कि इससे दिमाग तेज होता है और बढ़ती उम्र के साथ भी याददाश्त मजबूत रहती है। आप किसी भी उम्र में संगीत वाद्य यंत्र बजाना सीख सकते हैं।
#3
खेल खेलना
कई अध्ययनों से साबित हुआ है कि दिमाग पर जोर डालने वाले खेल उसे स्वस्थ बनाए रखते हैं। शतरंज और लूडो जैसे मुश्किल बोर्ड खेल दिमाग को चुनौती देते हैं, जिसका सीधा असर सोचने-समझने की क्षमता पर पड़ता है। ये महज मनोरंजन का साधन नहीं होते, बल्कि दिमाग को सक्रीय बनाए रखने वाले शौक होते हैं। रोजाना ऐसे खेल खेलने से बुद्धिमत्ता बढ़ती है और उम्र बढ़ने के साथ घटने वाली याददाश्त भी तेज रहती है।
#4
रचनात्मक गतिविधियां करना
अगर आपको गाने, नाचने, पेंटिंग करने या लिखने जैसे रचनात्मक शौक हैं तो भी आपका दिमाग बुढ़ापे तक तेज रहेगा। पेंटिंग, कला, बुनाई, क्रोशे या मिट्टी के बर्तन बनाने जैसे शौक से ध्यान केंद्रित करना आसान हो जाता है। वहीं, जर्नलिंग और कविता या कहानी लिखने से दिमाग की रचनात्मक रूप से कसरत होती है। नाचने-गाने से याददाश्त और निर्णय लेने जैसे संज्ञानात्मक कार्यों में सुधार होता है और मूड भी अच्छा रहता है।
#5
बागवानी
ज्यादातर लोग बुढ़ापे में बागवानी का शौक अपनाना पसंद करते हैं। यह तनाव और चिंता को कम करके सेरोटोनिन को बढ़ाता है, जिससे दिमाग को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है। बागवानी करने से दिमाग की नई कोशिकाओं का भी निर्माण होता है, जिससे याददाश्त में सुधार होता है। साथ ही इससे माइंडफुलनेस और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में भी सुधार होता है। इससे एक आदर्श रूटीन बनाना भी आसान हो जाता है।