
युवराज सिंह से बिल्डर ने की धोखाधड़ी, क्रिकेटर ने खटखटाया दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा
क्या है खबर?
भारत के पूर्व क्रिकेटर युवराज सिंह ने संपत्ति की खरीद में हुई धोखाधड़ी के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
उन्होंने याचिका दायर कर मामले का सुलटारा करने के लिए मध्यस्थ नियुक्त करने की मांग की है।
इस पर कोर्ट के न्यायाधीश सी हरि शंकर ने संबंधित बिल्डर को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। अब इस मामले की सुनवाई 5 अगस्त को होगी।
आइए इस पूरे मामले पर नजर डालते हैं।
प्रकरण
क्या है पूरा मामला?
याचिका के अनुसार, युवराज ने 24 नवंबर, 2020 को मैसर्स ब्रिलियंट एटोइल प्राइवेट लिमिटेड के बिल्डर ज्ञापन सिंह साथ एक समझौता पत्र (MOU) हस्ताक्षर किया था।
इसके तहत युवराज को दिल्ली के हौज खास की विस्तारित आबादी देह (लाल डोरा) क्षेत्र में उसकी रियल एस्टेट परियोजना 'स्काई मेंशन' का 'रिसलैंड' ब्रांड नाम से प्रचार, समर्थन और मार्केटिंग करनी थी।
इसके बदले उन्हें परियोजना में एक फैल्ट की खरीद पर 1.15 करोड़ का लाभ देने का वादा भी किया गया था।
धोखाधड़ी
युवराज को तय अवधि पर नहीं मिला अपार्टमेंट
दिसंबर 2020 में युवराज ने टावर-A की 23वीं मंजिल पर अर्पाटमेंट बुक कर लिया। इसके लिए 14.10 करोड़ रुपये की कीमत पर एक बिक्री समझौता हुआ था।
हालांकि, बिल्डर ने कब्जा देने में देरी की और 10 नवंबर, 2023 को ईमेल पर कब्जा पत्र भेज दिया।
युवराज ने जब फ्लैट की जांच की तो वह समझौते की शर्ताें के अनुसार नहीं था। इसके बाद उन्होंने कई बार बिल्डर से बात की, लेकिन इसका कोई समाधान नहीं निकल पाया।
जानकारी
बिल्डर ने कानूनी नोटिस पर भी नहीं दिया जवाब
युवराज ने इस मामले में 27 अप्रैल, 2024 को बिल्डर ज्ञापन को अपने नुकसान, मिलने वाली रियायत और अपार्टमेंट की गुणवत्ता में सुधार की मांग को लेकर एक कानूनी नोटिस भी भेजा था, लेकिन उसने जवाब दिए बिना ही समझौता समाप्त कर दिया।