यासीन मलिक ने 1990 के हत्याकांड से किया इनकार, फिर खुद के लिए क्यों मांगी मौत?
जम्मू और कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के मुखिया यासीन मलिक ने कहा है कि उनका 1990 में हुई कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट्ट की हत्या से कोई लेना-देना नहीं है। श्रीनगर की एक अदालत में दिए 25 पन्नों के हलफनामे में उन्होंने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया।
मलिक ने यह भी कहा कि 3 दशकों से ज्यादा समय बाद इस मामले में उनका नाम आने से उन्हें हैरानी हुई है। स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने जून 2026 की चार्जशीट में उनका नाम शामिल किया था।
यासीन मलिक ने अप्रत्याशित रूप से मांगी मौत की सजा
फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद मलिक ने दलील दी कि वे इस हत्या की योजना नहीं बना सकते थे। उन्होंने बताया कि वारदात से कुछ दिन पहले वे गंभीर चोटों के कारण कोमा में थे।
मलिक ने खुद को इस अपराध से जोड़ने वाले सभी दावों को खारिज कर दिया। उन्होंने सरला भट्ट को "एक बेकसूर नागरिक" बताया। उनका कहना था कि मुकदमे में हिस्सा न लेने का मतलब यह नहीं है कि वे अपना गुनाह कबूल करते हैं। एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए, मलिक ने अब मौत की सजा की मांग की है, जबकि पहले उन्होंने केस लड़ने से मना कर दिया था।