शिलॉन्ग में महिलाओं का हल्ला बोल, मातृसत्ता के मिथक को दी चुनौती
शिलॉन्ग में महिलाओं ने सड़कों पर उतरकर मेघालय में बढ़ते अपराधों और घरेलू हिंसा के मामलों पर आवाज उठाई। कई महिलाओं ने इस सोच पर सवाल उठाया कि मातृसत्तात्मक समाज होने से अपने आप सुरक्षा मिल जाती है।
उन्होंने बताया कि पितृसत्तात्मक सोच अभी भी गहरी जमी हुई है और कई घटनाएं तो रिपोर्ट ही नहीं हो पातीं। प्रदर्शनकारियों ने "यह सिर्फ एक कपड़ा है, हमारी सहमति नहीं" जैसे नारे लिखे पोस्टर उठाए हुए थे। वे महिलाओं की पसंद और उनकी सुरक्षा के सम्मान की मांग कर रही थीं।
मेघालय में महिलाओं के खिलाफ 658 अपराध दर्ज
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मेघालय में 2024 में महिलाओं के खिलाफ 658 अपराध दर्ज किए गए। यह संख्या 2023 के 628 मामलों से ज्यादा है। राज्य में अपराध दर 38.9 प्रतिशत है।
प्रदर्शनकारियों ने जोर देकर कहा कि यह मुद्दे सिर्फ यहीं के नहीं, बल्कि हर जगह मौजूद हैं। वरिष्ठ पत्रकार पेट्रीसिया मुखिम ने इन बातों को ऐसे समझाया: "हम दिल्ली और मुंबई से बहुत दूर हैं, लेकिन हमें पता है कि महिला पत्रकारों के साथ पुलिस गलत व्यवहार करती है। हमें महिलाओं के अधिकारों के लिए एकजुट होकर प्रदर्शन करना चाहिए कि वे जिस तरह के कपड़े पहनना चाहें, उन्हें पहनने का अधिकार है। किसी को यह हक नहीं है कि वह उनके पहनावे की वजह से उनके साथ छेड़छाड़ करे या उन्हें छुए। हम महिलाओं के अधिकारों के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। यहां की महिलाएं भी बाकी जगहों की तरह पितृसत्तात्मक शोषण का सामना करती हैं।"