देश में स्वास्थ्य खर्च में आई ऐतिहासिक कमी, सरकार और बीमा बने मददगार
स्वास्थ्य सेवाओं पर भारतीयों को अपनी जेब से अब बहुत कम खर्च करना पड़ रहा है। 2013-14 में जहां यह खर्च कुल स्वास्थ्य खर्च का 64.2 प्रतिशत था, वहीं 2022-23 में यह घटकर सिर्फ 43.4 प्रतिशत पर आ गया है। ऐसा इसलिए हो पाया है क्योंकि सरकार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य पर अपना खर्च बढ़ाया है और कई स्वास्थ्य योजनाओं के माध्यम से लोगों को राहत दी है।
निजी बीमा का हिस्सा बढ़कर 9.2 प्रतिशत हुआ
सरकार के स्वास्थ्य बजट में भी इजाफा हुआ है। GDP में इसका हिस्सा 1.15 प्रतिशत से बढ़कर 1.43 प्रतिशत हो गया है। साल 2013-14 के बाद से प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य खर्च दोगुने से भी ज्यादा बढ़ा है। इसके साथ ही सामाजिक सुरक्षा और निजी बीमा का चलन भी बढ़ा है। खासकर कोरोना वायरस महामारी के बाद, जब लोगों में स्वास्थ्य जोखिमों को लेकर ज्यादा जागरूकता आई है। निजी बीमा का हिस्सा 3.4 से बढ़कर 9.2 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इन सभी प्रयासों का नतीजा यह हुआ है कि अब परिवारों को स्वास्थ्य पर पड़ने वाला पूरा आर्थिक बोझ अकेले नहीं उठाना पड़ रहा है।