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क्या इस साल मानसून में औसत से कम होगी बारिश और यह चिंता का विषय है?
भारतीय मौसम विभाग ने इस साल मानसून में औसत से कम बारिश होने का पूर्वानुमान लगाया है

क्या इस साल मानसून में औसत से कम होगी बारिश और यह चिंता का विषय है?

Jun 08, 2026
08:34 pm

क्या है खबर?

दक्षिण-पश्चिमी मानसून ने 4 जून को आधिकारिक तौर पर केरलम में दस्तक दे दी है। हालांकि, भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अपने पूर्वानुमान में संशोधन करते हुए जून-सितंबर मानसून के दौरान देश में दीर्घकालिक औसत (LPA) की 90 प्रतिशत बारिश होने की संभावना जताई है। इसमें 4 प्रतिशत कम या ज्यादा की संभावना है। यह पूर्वानुमान पूर्व में जारी किए गए 92 प्रतिशत के अनुमान से कम है। जानते हैं क्या यह पूर्वानुमान लोगों के लिए चिंता का विषय है।

पूर्वानुमान

IMD ने अपने पूर्वानुमान में क्या कहा?

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम रविचंद्रन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "संख्यात्मक रूप से पूरे देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश दीर्घकालिक औसत की 90 प्रतिशत रहने की संभावना है। पहले हमने 92 प्रतिशत बारिश का अनुमान लगाया था, लेकिन अब इसे घटाकर 90 प्रतिशत कर दिया गया है। पूरे देश में बारिश सामान्य से कम रहेगी।" इस घोषणा के तुरंत बाद कई सवाल उठने लगे। आखिरी LPA के 90 प्रतिशत का मतलब क्या है?

सवाल

LPA के 90 प्रतिशत का मतलब क्या है?

LPA भारत की मानसूनी बारिश का एक लंबा ऐतिहासिक कालखंड (1971-2020) है। जून-सितंबर मानसून ऋतु के लिए यह आंकड़ा 87 सेंटीमीटर है। जब IMD कहता है कि बारिश LPA का 90 प्रतिशत होने की संभावना है, तो इसका मतलब है कि पूरे भारत में मानसून की बारिश उसके दीर्घकालिक औसत से थोड़ी कम रहेगी। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत के हर हिस्से में 10 प्रतिशत कम बारिश होगी। यह क्षेत्र के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है।

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बयान

बारिश में अंतर होना स्वाभाविक है- शेट्टी

स्वतंत्र मौसम पूर्वानुमानकर्ता अथरेया शेट्टी ने कहा, "आमतौर पर हर कोई अपने-अपने क्षेत्रों में समान बारिश की उम्मीद करता है, लेकिन हमें स्थानीय स्तर पर होने वाली भिन्नताओं और क्षेत्रीय कारकों पर भी ध्यान देना चाहिए जो पूर्वानुमान के दोनों ओर मौसमी बारिश की मात्रा को कम या ज्यादा कर सकते हैं।" उन्होंने कहा, "हमारा देश विशाल है और यहां सूक्ष्म जलवायु विविधताएं बहुत अधिक हैं, इसलिए बारिश में महत्वपूर्ण विचलन होना स्वाभाविक है।"

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मात्रा

'अपर्याप्त' बारिश का क्या अर्थ है?

पूर्वानुमान श्रेणियां भी भ्रामक हो सकती हैं। LPA के 96 से 104 प्रतिशत के बीच की बारिश को सामान्य माना जाता है। 90-95 प्रतिशत के बीच सामान्य से कम श्रेणी में आती है, जबकि 90 प्रतिशत से कम को अपर्याप्त माना जाता है। LPA के 90 प्रतिशत पर पूर्वानुमान सामान्य से कम और अपर्याप्त श्रेणियों के बीच की सीमा पर स्थित होता है। IMD ने यह भी कहा है कि मानसून के कमजोर रहने की 60 प्रतिशत संभावना है।

राहत

सुरक्षित क्षेणी में है IMD का पूर्वानुमान

शेट्टी ने कहा, "सामान्य से कम बारिश का मतलब है कि बारिश सामान्य औसत से कम होगी, लेकिन यह सुरक्षित सीमा में है और इससे ज्यादा असर पड़ने की संभावना नहीं है। अपेक्षित बारिश के 90 प्रतिशत से कम होने पर अपर्याप्त बारिश होती है।" उन्होंने कहा, "सबसे खराब स्थिति में उन कुछ क्षेत्रों में सूखे लाती है, जहां पहले से कम बारिश होती है। सामान्य से कम मानसून का मतलब यह नहीं है कि पूरे देश में सूखा पड़ेगा।"

इतिहास

भारत में पहले भी सामान्य से कम रहे हैं मानसून

शेट्टी ने बताया कि भारत में पहले भी सामान्य से कम मानसून रहे हैं, लेकिन व्यापक सूखा नहीं पड़ा। इसका प्रभाव कई कारकों पर निर्भर करता है, जिनमें बारिश की कमी के क्षेत्र, बारिश का वितरण, जलाशयों में पानी और स्थानीय जल उपलब्धता शामिल हैं। राष्ट्रीय स्तर पर औसत से कम बारिश वाले मौसम में भी कई क्षेत्रों में पर्याप्त बारिश हो सकती है। दूसरी ओर, कुछ क्षेत्रों में तेज बारिश होने से अलग तरह की समस्याएं हो सकती हैं।

सलाह

एक मौसमी पूर्वानुमान पर ज्यादा भरोसा करना सही नहीं

शेट्टी ने बताया कि मौसम विज्ञानी एक मौसमी पूर्वानुमान पर अत्यधिक भरोसा न करने की चेतावनी देते हैं। दक्षिण-पश्चिम मानसून 4 महीने तक चलता है और इस दौरान मौसम में काफी बदलाव आ सकते हैं। यही कारण है कि IMD अपने पूर्वानुमान के साथ-साथ मासिक पूर्वानुमान, साप्ताहिक वर्षा आकलन और प्रमुख वर्षा घटनाओं के पूर्वानुमान भी जारी करता है। उन्होंने बताया कि IMD के पूर्वानुमानों और किसी भी प्रमुख वर्षा घटना से अवगत रहने से स्थिति का अंदाजा लग जाएगा।

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