#NewsBytesExplainer: क्या होते हैं फास्ट ट्रैक कोर्ट, इनके गठन से हो जाएगा पेपर लीक का समाधान?
क्या है खबर?
NEET विवाद और पेपर लीक को लेकर हो रहे प्रदर्शन के बीच पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द कठोर दंड देने और केस के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की बात कही। इससे पहले भी कई मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया गया है। आइए समझते हैं इनका इतिहास क्या बताता है।
फास्ट ट्रैक कोर्ट
क्या होते हैं फास्ट ट्रैक कोर्ट?
फास्ट ट्रैक कोर्ट वह विशेष कोर्ट होती हैं, जिनका गठन लंबे समय से लंबित मामलों के निपटारे या संवेदनशील या जघन्य अपराध की तेज सुनवाई के लिए किया जाता है।
इनका उद्देश्य मुकदमों की प्रक्रिया को छोटा कर जल्द से जल्द फैसला सुनाना होता है, ताकि पीड़ितों को जल्द न्याय मिल सके और कोर्ट पर बोझ को कम किया जा सके।
आमतौर पर महिलाओं के विरुद्ध अपराध, POCSO मामलों, दुष्कर्म या गंभीर अपराधों की सुनवाई इनमें होती है।
इतिहास
क्या है फास्ट ट्रैक कोर्ट का इतिहास?
पहली बार इस तरह के कोर्ट की स्थापना साल 2000 में की गई थी। तब 11वें वित्त आयोग की सिफारिशों के बाद इनकी शुरुआत की गई थी।
उस समय देश भर में 1,734 फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने के लिए फंड आवंटित किया गया था।
राज्यों में जल्दी सुनवाई और न्याय देने के उद्देश्य से हाई कोर्ट की सलाह के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार को दे दी गई।
मामले
फास्ट ट्रैक कोर्ट में किन मामलों की सुनवाई होती है?
सामान्य दीवानी या आपराधिक मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में नहीं होती, क्योंकि इनमें गवाहों और सबूतों का लंबा सिलसिला चलता है।
कुछ राज्यों में वरिष्ठ नागरिकों या लंबे समय से लंबित मामलों को प्राथमिकता दी जाती है।
अगर कोई पक्ष जल्दी सुनवाई चाहता है तो वह हाई कोर्ट से मामले को फास्ट ट्रैक में भेजने की मांग कर सकता है।
यौन उत्पीड़न, POCSO, बाल अपराध, भ्रष्टाचार और वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट भेजे जाते हैं।
प्रभावी
क्या NEET मामले में प्रभावी साबित होंगे फास्ट ट्रैक कोर्ट?
पूर्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सिद्धार्थ लूथरा ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, "परीक्षा लीक मामलों से निपटने के लिए विशेष कोर्ट दोषियों को सज़ा देने के लिए अहम हैं, लेकिन यह ध्यान रखना चाहिए कि इन्हें सभी राज्यों में बनाया जाना चाहिए, क्योंकि NEET पेपर लीक ऐसी अकेली घटना नहीं है। इससे भी ज्यादा जरूरी है कि UGC, मानव संसाधन विकास मंत्रालय और राज्यों के उच्च शिक्षा विभाग भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं।"
विशेषज्ञ
क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ?
इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए पूर्व कानून सचिव पीके मल्होत्रा ने कहा, "हमारे पास विशेष कोर्ट की धारणा है, जिसका जिक्र अलग-अलग कानूनों में किया गया है। उदाहरण के लिए, CBI के लिए विशेष कोर्ट है। इन विशेष कोर्ट के लिए प्रावधान उसी खास कानून में किए जाते हैं। पेपर लीक खासकर NEET मामलों को किस कानून के तहत लाया जाएगा? अगर उन्हें किसी खास कानून के तहत लाया जाता है, तो शायद विशेष कोर्ट बनाए जा सकते हैं।"
आंकड़े
क्या बताते हैं फास्ट ट्रैक कोर्ट्स से जुड़े आंकड़े?
मार्च 2025 में सरकार ने संसद में बताया था कि फास्ट ट्रैक कोर्ट में मामलों के निपटारे की दर 96.28 प्रतिशत रही।
केवल 2024 में 88,902 नए मामले दर्ज किए गए, जबकि 85,595 मामलों का निपटारा किया गया।
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा, "31 जनवरी 2025 तक 30 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 745 फास्ट ट्रैक कोर्ट काम कर रहे हैं, जिनमें 404 विशेष POCSO कोर्ट शामिल हैं। इन्होंने 3.06 लाख से ज्यादा मामलों का निपटारा किया है।"