#NewsBytesExplainer: बिना चुनाव जीते 6 महीने से मंत्री दीपक प्रकाश, सुप्रीम कोर्ट सख्त; क्या जाएगा पद?
क्या है खबर?
बिहार के मंत्री दीपक प्रकाश को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की है। दरअसल, दीपक न तो विधानसभा और ना ही विधान परिषद के सदस्य हैं। इसके बावजूद वे मंत्री पद पर हैं। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर दीपक को पद से हटाने की मांग की गई है। कोर्ट ने कहा कि यह पूरी तरह से कानून का मामला है। आइए पूरा विवाद समझते हैं।
मंत्री दीपक
क्या है दीपक के मंत्री बनाए जाने का मामला?
दीपक पहली बार 20 नवंबर, 2025 को नीतीश कुमार की सरकार में मंत्री बने थे। तब वे विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं थे। इस दौरान वे 15 अप्रैल को नीतीश के इस्तीफा देने के समय 4 महीने और 26 दिन तक मंत्री रहे।
अगले 22 दिन तक उन्होंने कोई मंत्री पद नहीं संभाला।
सम्राट चौधरी की सरकार में 7 मई को दीपक को फिर मंत्री बनाया गया। तब भी वे विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं थे।
कानून
क्या कहता है कानून?
संविधान के अनुच्छेद 164(4) के मुताबिक, किसी ऐसे व्यक्ति को, जो राज्य विधानमंडल का सदस्य नहीं है, अधिकतम 6 महीने तक ही मंत्री पद पर रह सकता है। अगर इस दौरान वह विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य नहीं बनता, तो उसे मंत्री पद छोड़ना होता है।
यानी किसी व्यक्ति को बिना चुनाव जीते मंत्री तो बनाया जा सकता है, लेकिन उसे 6 महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद की सदस्यता हासिल करनी होती है।
मामला
दीपक के मामले में क्या है पेंच?
दीपक के मामले में एक अलग बात ये है कि वे लगातार 6 महीने तक मंत्री पद पर नहीं रहे। वे नीतीश सरकार में 4 महीने 26 दिन तक मंत्री पद पर रहे। फिर इस्तीफा दे दिया और सम्राट की सरकार में मंत्री बने।
हालांकि, कुल मिलाकर देखा जाए तो वे 6 महीने से ज्यादा समय तक मंत्री पद पर हैं। पहली बार मंत्री बनने के हिसाब से 6 महीने की समयसीमा 20 मई को खत्म हो गई है।
याचिका
याचिका में क्या मांग की गई है?
ये याचिका बिहार के रहने वाले राकेश कुमार सिंह ने दायर की है। इसमें कहा गया है कि दीपक प्रकाश संविधान के अनुच्छेद 164(4) में निर्धारित 6 महीने की सीमा समाप्त होने के बाद भी मंत्री पद पर बने हुए हैं, जबकि वे अभी तक राज्य की किसी भी विधायिका के सदस्य नहीं बने हैं, जो 'संविधान के साथ धोखाधड़ी' है।
इसी महीने याचिका पर मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस वीएस मोहना की पीठ ने सुनवाई की थी।
पिछले मामले
पहले कब-कब सामने आए हैं ऐसे मामले?
किसी व्यक्ति को विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बने बिना मंत्री पद की शपथ दिलाना आम बात है। 2019 में उद्धव ठाकरे जब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने थे, तब वे विधायक नहीं थे। वे बाद में विधान परिषद के लिए चुने गए।
हालांकि, 2021 में 6 महीने की समयसीमा के चलते उत्तराखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को पद से इस्तीफा देना पड़ा था। तब कोरोना महामारी के कारण उपचुनाव कराना संभव नहीं था।
कोर्ट
सुनवाई के दौरान क्या-क्या हुआ?
CJI सूर्यकांत ने पूछा कि क्या दीपक प्रकाश अभी भी मंत्री पद पर बने हुए हैं? इस पर याचिकाकर्ता ने बताया कि हां वे अब भी मंत्री पद पर बने हैं।
फिर कोर्ट ने कहा, "यह कानून का शुद्ध प्रश्न है। राज्य सरकार को यह बताना होगा कि कोई मंत्री बिना विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बने 6 महीने से अधिक समय तक मंत्री पद पर कैसे बना रह सकता है?"