होर्मुज के बाद ट्रंप की मलक्का जलडमरूमध्य पर नजर, इंडोनेशिया से समझौता किया; भारत क्यों चिंतित?
क्या है खबर?
अमेरिका और ईरान ने इस समय होर्मुज जलडमरूमध्य पर नाकेबंदी कर रखी है। कच्चे तेल और गैस के परिवहन के लिए अहम इस नाकेबंदी से भारत समेत कई देशों पर गंभीर असर पड़ा है। इस बीच अमेरिका की एक और योजना ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। चर्चाएं है कि अमेरिका की नजरें वैश्विक व्यापार के लिए एक और अहम रास्ते मलक्का जलडमरूमध्य पर है। अमेरिका-इंडोनेशिया के बीच एक समझौते ने इन चर्चाओं को और बल दिया है।
समझौता
अमेरिका-इंडोनेशिया में क्या समझौता हुआ है?
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इंडोनेशिया के बीच 13 अप्रैल को एक नया रक्षा समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत, अब अमेरिकी लड़ाकू विमान इंडोनेशिया के हवाई क्षेत्र में ज्यादा आसानी से उड़ान भर सकेंगे। अमेरिका ने इसे दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक कदम बताया है, लेकिन पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच समझौते के समय को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
मलक्का
मलक्का जलडमरूमध्य के बारे में जानिए
मलक्का जलडमरूमध्य दक्षिण-पूर्व एशिया में एक संकरा समुद्री मार्ग है। यह मलेशिया और इंडोनेशिया के बीच स्थित है और हिंद महासागर को दक्षिण चीन सागर से जोड़ता है। मलक्का जलडमरूमध्य पर इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर का नियंत्रण है। इसका क्षेत्रफल लगभग 65,000 वर्ग किलोमीटर है और लंबाई 900 किलोमीटर है। हालांकि, फिलिप चैनल पर इसकी चौड़ाई केवल 3 किलोमीटर है। यानी ये होर्मुज जलडमरूमध्य से भी करीब 9 गुना ज्यादा संकरा है।
अहमियत
कितना अहम है मलक्का जलडमरूमध्य ?
मलक्का जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक है। हर साल 80,000 से ज्यादा जहाज इस जलडमरूमध्य से वैश्विक व्यापार का करीब 40 प्रतिशत और गैस आपूर्ति का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा लेकर गुजरते हैं। लॉजिस्टिक्समिडिलईस्ट डॉट कॉम के अनुसार , मलक्का जलडमरूमध्य आधुनिक रेशम मार्ग का रूप है, जहां से रोजाना लगभग 23 मिलियन बैरल तेल गुजरता है। 2025 के पहले 6 महीनों में मलक्का से रोजाना 9.2 अरब घन फीट LNG की भी आवाजाही हुई।
अमेरिका
मलक्का पर क्यों हैं अमेरिका की नजरें?
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका हिंद प्रशांत में बड़े समुद्री रास्तों को सुरक्षित करने की रणनीति पर काम कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया के अहम चोकपॉइंट्स पर अमेरिका अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। अमेरिका की सीधी आर्थिक निर्भरता यहां कम है, लेकिन वह इसे रणनीतिक और सैन्य नजरिए से देखता है। अपनी भौगोलिक स्थिति के चलते भविष्य के किसी भी युद्ध में यह दबाव बनाने का अहम बिंदु बन सकता है।
भारत
भारत के लिए कितना अहम है मलक्का?
भारत के समुद्री व्यापार का लगभग 60 प्रतिशत और LNG आयात का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मलक्का से गुजरता है। भारत का लगभग 55 प्रतिशत व्यापार मलक्का जलडमरूमध्य और सिंगापुर क्षेत्र से होकर गुजरता है। मलक्का के पास ही भारत का नया रणनीतिक कमांड अंडमान-निकोबार भी है। ग्रेट निकोबार परियोजना के तहत भारत निकोबार द्वीप में नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल होने वाला रणनीतिक शहर बसाने जा रहा है, जो करीब 166 वर्ग किलोमीटर दायरे में फैला होगा।
चीन
चीन के लिए क्यों अहम है मलक्का जलडमरूमध्य?
मनीकंट्रोल के अनुसार, चीन के तेल आयात का लगभग 62 प्रतिशत हिस्सा मलक्का से होकर गुजरता है। इसकी लगभग आधी तेल आपूर्ति प्रतिदिन इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरती है। ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के मुताबिक, 2024 में चीन के लगभग 32.5 लाख करोड़ रुपये के ऊर्जा आयात का 80 प्रतिशत हिस्सा मलक्का से गुजरा था। मनीकंट्रोल का कहना है कि चीन ने वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के निर्माण में 2 दशक बिताए हैं, फिर भी वह मलक्का-होर्मुज पर निर्भर है।