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प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीयों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील क्यों की?
प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीयों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की है

प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीयों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील क्यों की?

लेखन गजेंद्र
May 11, 2026
12:15 pm

क्या है खबर?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को भारतीयों से अपने खर्चों में कटौती करने का आग्रह किया है। उन्होंने खासतौर पर सोने की खरीदारी कम करने, विदेश यात्रा स्थगित करने और घर से काम करने की अपील की है, जो लोगों को खटक रही है। भारत जैसे देश में जहां सोना सिर्फ निवेश नहीं बल्कि परंपरा, बचत और पारिवारिक समारोहों से गहराई से जुड़ा है, वहां प्रधानमंत्री लोगों से सोना न खरीदने का आग्रह क्यों कर रहे हैं? आइए, जानते हैं।

बयान

प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा था?

प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को तेलंगाना के हैदराबाद में भाजपा की रैली को संबोधित कर कहा कि आज के समय में विदेशी मुद्रा को बचाना बहुत आवश्यक है। उन्होंने कहा, "सोने की खरीद। इसमें विदेशी मुद्रा बहुत अधिक खर्च होती है। एक जमाना था, जब संकट-युद्ध होने पर लोग देशहित में सोना दान देते थे। आज दान की जरूरत नहीं है, लेकिन देशहित में हमको तय करना होगा कि एक साल तक कोई भी पारिवारिक कार्यक्रम हो, सोना नहीं खरीदेंगे।"

चिंता

क्या है चिंता?

इस बयान के पीछे एक बड़ी आर्थिक चिंता छिपी है। पश्चिम एशिया में तनाव की वजह से वैश्विक ऊर्जा संकट छाया हुआ है, जिससे भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ रहा है और रुपये का कमजोर हो रहा है। हाल के हफ्तों में वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें लगभग 70 डॉलर (करीब 6,600 रुपये) प्रति बैरल से बढ़कर लगभग 126 डॉलर (करीब 11,900) प्रति बैरल हो गई हैं, जिससे भारत का आयात भुगतान तेजी से बढ़ गया है।

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संकट

तेल संकट में सोना क्यों बन रहा मुद्दा?

आर्थिक दृष्टि से देखें तो भारत के लिए सोना और कच्चा तेल समान है। दोनों बड़े पैमाने पर आयातित है और इसके लिए अमेरिकी डॉलर में भुगतान होता है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत आयात करता है और दुनिया में सोने का दूसरा बड़ा आयातक भी है। ऐसे में जब तेल के दाम बढ़ रहे हैं और सोना जमकर आयात हो रहा है तो भारत पर विदेशी मुद्रा अधिक खर्च करने का दबाव बढ़ा है।

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संकट

सोना खरीदने से कम हो रहा विदेशी मुद्रा भंडार

कच्चा तेल परिवहन, बिजली और औद्योगिक गतिविधियों के लिए जरूरी है, वहीं सोने का आयात विवेकाधीन खर्च या निवेश माना जाता है। मौजूदा वैश्विक संकट में जब भारतीय परिवार बड़ी मात्रा में बाहर से आने वाला सोना खरीदते हैं, तो देश से अधिक डॉलर बाहर जाता है। इससे भारत का चालू खाता घाटा बढ़ता है। चालू घाटा बढ़ने से अक्सर रुपया कमजोर होता है, क्योंकि देश कमाई से ज्यादा विदेशी मुद्रा खर्च कर रहा होता है।

ट्विटर पोस्ट

सुनिए, क्या बोले थे प्रधानमंत्री मोदी

मांग

सोना कारोबारी PMO से मिलेंगे

इस बीच, खबर आई है कि प्रधानमंत्री की अपील से आभूषण संघ यानि सोने के कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। संगठन के पदाधिकारियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अधिकारियों से मिलने की अनुमति मांगी है। उनकी बैठक मंगलवार को हो सकती है। बता दें कि सोमवार को शेयर बाजार खुलने के बाद कई ज्वैलरी कंपनियों के शेयर में 5 से 10 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है।

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