LOADING...
#NewsBytesExplainer: मानसून में देरी के पीछे केवल अल-नीनो नहीं, ये कारण भी हैं जिम्मेदार
मानसून बीते करीब 10 दिनों से आगे नहीं बढ़ा है (फाइल तस्वीर)

#NewsBytesExplainer: मानसून में देरी के पीछे केवल अल-नीनो नहीं, ये कारण भी हैं जिम्मेदार

लेखन आबिद खान
Jun 19, 2026
07:19 pm

क्या है खबर?

4 जून को केरलम में पहुंचने के बाद मानसून अटक गया है। बीते करीब 10 दिन से मानसून आगे नहीं बढ़ा है, जिससे लगभग पूरे देश खासतौर पर मध्य भारत के राज्यों की चिंता बढ़ गई है। फिलहाल मानसून 19 राज्यों में पहुंच चुका है, लेकिन उत्तर-मध्य भारत के 7 राज्य सूखे हैं। इसके पीछे अल-नीनो को जिम्मेदार माना जा रहा है। हालांकि, इसके अलावा भी कई कारण हैं, जो मानसून की पिछड़ने के लिए जिम्मेदार हैं।

अल-नीनो

सक्रिय हुआ अल-नीनो

अल-नीनो इस महीने की शुरुआत से सक्रिय हो चुका है और इसके धीरे-धीरे और मजबूत होने की संभावना है। हालांकि, केवल अल-नीनो मानसून को रोक नहीं सकता , लेकिन यह बारिश की गतिविधि के लिए अनुकूल परिस्थितियों को प्रभावित करता है। अल-नीनो प्रशांत महासागर में पानी के गर्म होने की मौसमी घटना है, जिससे मानसूनी हवाएं कमजोर हो जाती हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) का मानना है कि इससे मध्य और दक्षिण भारत में बहुत कम बारिश हो सकती है।

मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन

मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन भी है वजह

मानसून की बेरूखी का एक और महत्वपूर्ण कारण मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) का कमजोर होना है। ये उष्णकटिबंधीय वर्षा की एक धारा है जो पूरी दुनिया में घूमती रहती है। MJO बादलों को दक्षिण भारत से उत्तर भारत की ओर लाने में अहम भूमिका निभाता है। जून के पहले पखवाड़े के दौरान MJO प्रतिकूल अवस्था में रहा, जिससे हिंद महासागर के ऊपर बादल बनने के लिए जरूरी परिस्थितियां विकसित नहीं हो सकीं।

Advertisement

प्रशांत महासागर

बंगाल की खाड़ी में कोई सिस्टम सक्रिय नहीं

जून की शुरुआत में हिंद महासागर में मानसूनी हवाओं का प्रवाह बढ़ा था, लेकिन प्रशांत महासागर में उष्णकटिबंधीय वायु प्रवाह से ये प्रभावित हो गया। यही बाद में तीव्र होकर टाइफून जगमी में बदल गया। इसका नतीजा ये हुआ कि भारत में मानसून को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव प्रणाली बनाने में मदद करने के बजाय इसका कुछ हिस्सा पूर्व की ओर मुड़ गया।

Advertisement

अन्य वजहें

ये कारण भी हैं जिम्मेदार

अरब सागर में दक्षिण-पश्चिमी नमी वाली हवाएं कमजोर हो गई हैं। इससे महाराष्ट्र और आसपास तक पर्याप्त नमी नहीं पहुंच रही है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में मजबूत सिस्टम नहीं विकसित हो रहे। प्रशांत महासागर में हवाएं पश्चिम से सीधी और पूर्व की ओर बहने लगी हैं। आमतौर पर नमी को केंद्रित करने और ऊपर उठने के लिए हवाओं को घुमावदार बहना होता है। भूमध्य रेखा पार करने वाली हवाओं में नमी की कमी हो गई है।

बयान

क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ?

हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए स्काईमेट के उपाध्यक्ष महेश पलावत ने कहा, "फिलहाल बंगाल की खाड़ी के ऊपर कोई मौसम प्रणाली नहीं है। देश के पूर्वी हिस्सों में मानसून को गति देने के लिए निम्न दबाव क्षेत्र या डिप्रेशन का होना जरूरी है। अरब सागर से पश्चिमी तट तक मानसून को खींचने के लिए भी इसकी आवश्यकता है।" IMD के महानिदेशक एम मोहपात्रा ने कहा कि अरब सागर में नमी की मात्रा फिलहाल कम है।

बारिश

देश में सामान्य से 38 प्रतिशत कम बारिश

1 से 18 जून के बीच देश में सामान्य से 38 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। सबसे खराब स्थिति गुजरात की है, जहां सामान्य से 79 प्रतिशत कम बारिश हुई। इसके बाद महाराष्ट्र में 78 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। वहीं, मध्य भारत में 62 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में 42 प्रतिशत कम बारिश हुई है। दक्षिण भारत में भी बारिश में 21 प्रतिशत की कमी आई है।

रफ्तार

कब रफ्तार पकड़ सकता है मानसून?

मौसम विभाग का अनुमान है कि जून के आखिर में मानसून के आगे बढ़ने की बेहतर परिस्थितियां विकसित हो जाएंगी। 22 से 28 जून के बीच आंतरिक कर्नाटक, दक्षिणी तमिलनाडु और पश्चिमी घाट के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। 29 जून से 5 जुलाई के बीच मानसून में और अधिक तेजी आने की संभावना है। इस दौरान दक्षिणी केरल के पश्चिमी घाट और कोंकण क्षेत्र में भारी वर्षा हो सकती है।

Advertisement