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देश में क्यों पड़ रही इतनी भीषण गर्मी? अल नीनो या जलवायु परिवर्तन है जिम्मेदार?
देश में इस साल भीषण गर्मी ने पिछले कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं

देश में क्यों पड़ रही इतनी भीषण गर्मी? अल नीनो या जलवायु परिवर्तन है जिम्मेदार?

लेखन आबिद खान
May 20, 2026
06:09 pm

क्या है खबर?

देश में इस साल गर्मी लगातार रिकॉर्ड तोड़ रही है। कई शहरों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंच गया है। दिल्ली में तापमान 42 से 44 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि अहमदाबाद और नागपुर में पारा 41 से 43 डिग्री और जयपुर और लखनऊ में 40 से 41 डिग्री तक पहुंच गया। उत्तर प्रदेश के बांदा में लगातार दूसरे दिन तापमान 47 डिग्री को पार कर गया। आइए समझते हैं इस साल भीषण गर्मी क्यों पड़ रही है।

पूर्वानुमान

अगले एक हफ्ते गर्मी से राहत के आसार नहीं

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का अनुमान है कि कई दिनों तक लू से लेकर भीषण लू की स्थिति बनी रहेगी और तापमान सामान्य से ज्यादा रहने की संभावना है। मौसम एजेंसी स्काईमेट के मुताबिक मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, छत्तीसगढ़, ओडिशा, महाराष्ट्र और गुजरात समेत देश के 10 राज्यों में अगले एक हफ्ते तक सूखी और गर्म हवाएं चलेंगी। इन राज्यों में अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा रहेगा।

वजह

क्यों बढ़ रही है गर्मी?

आमतौर पर अप्रैल और मई के महीनों में सौर विकिरण में वृद्धि, शुष्क महाद्वीपीय हवाओं और राजस्थान जैसे पश्चिमी राज्यों और पड़ोसी पाकिस्तान में निम्न दबाव वाले क्षेत्रों के कारण तापमान बढ़ जाता है। हालांकि, इस साल जो तेज गर्मी पड़ रही है, उसके पीछे घरेलू और वैश्विक दोनों कारण जिम्मेदार हैं। घरेलू कारणों में शहरी ताप प्रभाव और वैश्विक कारणों में जलवायु परिवर्तन और अल नीनो प्रभाव को वजह माना जा रहा है।

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शहरी ताप

घरेलू वजहों में 'शहरी ताप प्रभाव' सबसे अहम

भीषण गर्मी के पीछे घरेलू कारणों में 'शहरी ताप द्वीप' प्रभाव को अहम माना जा रहा है। ये एक ऐसी घटना है, जिसमें शहरों और महानगरों में आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में कहीं अधिक तापमान होता है। कभी-कभी तापमान का अंतर 10 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा हो जाता है। इसका मुख्य कारण यह है कि शहरों में वनस्पति और हरियाली की जगह स्टील, कांच और कांक्रीट की संरचनाएं बन गई हैं जो गर्मी को सोखती हैं।

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अल नीनो

अल नीनो भी जिम्मेदार

तेज गर्मी की एक बड़ी वजह भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में विकसित हो रही अल नीनो की स्थिति है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन के अनुसार, मई और अगस्त के बीच इसके सक्रिय होने की उच्च संभावना है। अल नीनो के कारण समुद्र का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है, जिससे हवा के पैटर्न में बदलाव आता है। इससे कहीं भयंकर सूखा तो कहीं बाढ़ आती है। अब तक का सबसे गर्म वर्ष 2024 भी इसी कारण तपा था।

अल नीनो प्रभाव

क्या होता है अल नीनो?

अल नीनो एक मौसमी घटना है, जिसमें मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्री सतह का पानी सामान्य से अधिक गर्म होने लगता है। इसके चलते पूर्व से पश्चिम की ओर बहने वाली हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं और गर्म पानी पूर्व यानी अमेरिका के पश्चिमी तट की ओर जाने लगता है। आमतौर पर ये 2 से 7 साल तक के अनियमित अंतराल पर होता है। इसका असर भारत में कमजोर मानसून और सूखे के रूप में पड़ता है।

सूखा

अल नीनो के चलते सूखा पड़ने की आशंका

अमेरिकी मौसम एजेंसी नेशनल ओशेनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के अनुसार, प्रशांत महासागर का तापमान इस बार मई में सामान्य से 0.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा है। भारत पर इसका सबसे बड़ा असर मानसून पर पड़ेगा, जिसके चलते कुछ जगहों पर सूखा पड़ सकता है। पिछले 100 सालों में भारत में 18 बार पड़े सूखे में 13 का संबंध अल नीनो से रहा है। 2001 से 2020 के बीच देश में 7 बार अल नीनो का प्रभाव देखा गया।

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