युवाओं को खोने का डर, RSS का बढ़ता दबाव; धर्मेंद्र प्रधान से क्यों लिया गया इस्तीफा?
क्या है खबर?
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 35 दिन से चल रहे धरना प्रदर्शन का अंत हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रदर्शन खत्म कर दिया है। इस कदम से ठीक पहले कई रिपोर्ट में दावा किया जा रहा था कि सरकार प्रधान से इस्तीफा लेने के पक्ष में नहीं है। फिर आखिर ऐसा क्या हुआ कि प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। आइए इसके पीछे की वजहों को समझते हैं।
दायरा
बढ़ता जा रहा था प्रदर्शन का दायरा
CJP ने जब प्रदर्शन शुरू किया, तब इतनी भीड़ नहीं थी। जब सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर बैठे तो चर्चा बढ़ने लगी। एक बड़ा मोड़ तब आया, जब वांगचुक को सरकार ने धरना स्थल से उठा लिया। इसके बाद जंतर-मंतर पर लोग बढ़ने लगे।
इसके बाद 20 जुलाई को लाठीचार्ज हुआ। पुलिसिया कार्रवाई के वीडियो वायरल हुए।
विपक्ष के नेता राहुल गांधी प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठ गए। यानी प्रदर्शन का दायरा बढ़ता जा रहा था।
पार्टी
पार्टी के भीतर से उठती आवाजें, सेलिब्रिटिज का समर्थन
इस मुद्दे पर भाजपा के ज्यादातर बड़े नेताओं ने चुप्पी साधे रखी। यहां तक के भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के भी बयान नहीं आए। इस बीच भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने भी छात्रों की मांगों का समर्थन किया।
खिलाड़ी, बॉलीवुड अभिनेता, दक्षिण सिनेमा से जुड़े लोग, सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर भी विरोध प्रदर्शन से जुड़ने लगे। मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठा। कई देशों में युवाओं के समर्थन में प्रदर्शन हुए।
युवा
युवाओं की नाराजगी का डर
हिंदुस्तान टाइम्स से NDA की पार्टी के एक पदाधिकारी ने कहा, "कोई भी पार्टी युवाओं को नाराज करने का जोखिम नहीं उठा सकती। देश का इतिहास रहा है कि युवाओं ने आपातकाल के खिलाफ जेपी आंदोलन और भ्रष्टाचार विरोधी भारत आंदोलन को अपने कंधों पर उठाया है। पंजाब और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भी चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में विपक्ष को सरकार पर युवाओं की अनदेखी करने का आरोप लगाने का मौका मिल जाता।"
RSS
भाजपा पर RSS का बढ़ता दबाव
24 जुलाई को राष्ट्रीय स्वयंवसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, "नई पीढ़ी सवाल पूछती है। हमें उन्हें तर्क समझाना होगा, बहुत स्नेह देना होगा, उनके साथ समय बिताना होगा, संवाद करना होगा।"
इसे भाजपा को एक संदेश के तौर पर देखा गया।
एक RSS पदाधिकारी ने कहा, "संघ ने साफ कहा कि विरोध-प्रदर्शन को हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने सरकार से प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने का आग्रह किया और व्यवस्थागत सुधारों की जरूरत पर बल दिया।"
चुनाव
विधानसभा चुनाव में नुकसान की आशंका
उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड में अगले साल विधानसभा चुनाव होना है। अगर प्रदर्शन लंबा चलता तो इसका असर चुनाव के लिहाज से भाजपा के लिए नुकसानदायक हो सकता था।
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और पंजाब में आम आदमी पार्टी मजबूत स्थिति में है। उत्तर प्रदेश के कई शहरों में पेपर लीक को लेकर प्रदर्शन हुए।
इसी तरह पंजाब में मजबूत AAP भी विरोध प्रदर्शनों का बड़ा चेहरा रही। AAP के कई नेता जंतर-मंतर पहुंचे थे।