पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग कौन हैं, जिन्होंने GDP के आंकड़ों पर उठाए सवाल?
क्या है खबर?
सरकार ने 31 अगस्त को इस वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के GDP विकास दर का आंकड़ा जारी किया था। सरकार ने कहा कि इस दौरान GDP वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही। हालांकि, इसके बाद से ही आंकड़ों को लेकर विवाद होने लगा। इसके केंद्र में पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग रहे, जिन्होंने दावा किया कि विकास दर केवल 2.6 प्रतिशत रही। आइए गर्ग के बारे में जानते हैं।
शुरुआती जीवन
कौन हैं सुभाष गर्ग?
16 अक्टूबर, 1960 को राजस्थान की राजधानी जयपुर में जन्मे गर्ग राजस्थान कैडर के सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं।
उन्होंने अजमेर के सरकारी कॉलेज से LLB और BCom में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है। वे 'इंस्टीट्यूट ऑफ़ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया' से अकाउंटेंट भी हैं।
गर्ग को प्रशासन, प्रबंधन और सार्वजनिक नीति, वित्त और कृषि, शिक्षा, ऊर्जा और ग्रामीण विकास में 3 दशकों से ज्यादा का अनुभव है।
नियुक्तियां
किन अहम पदों पर रहे हैं गर्ग?
गर्ग 2014 में केंद्र सरकार में आए और उन्हें विश्व बैंक में कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया गया। वहां उन्होंने भारत, बांग्लादेश, भूटान और श्रीलंका का प्रतिनिधित्व किया।
जून 2017 में उन्हें वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले आर्थिक मामलों के विभाग (DEA) में सचिव नियुक्त किया गया। वे 2 साल तक इस पद पर रहे और 2019 में वित्त सचिव के रूप में कार्यभार संभाला।
जुलाई 2019 में उन्हें बिजली मंत्रालय में स्थानांतरित कर दिया गया।
इस्तीफा
सेवानिवृत्ति से पहले ही छोड़ी नौकरी
बिजली मंत्रालय में जाने के ठीक एक दिन बाद गर्ग ने IAS से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन कर दिया। जबकि, उनकी सेवानिवृत्ति अक्टूबर 2020 में निर्धारित थी।
कथित तौर पर इसके पीछे सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ उनके मतभेदों को वजह बताया जाता है। कहा जाता है कि आर्थिक मामलों के सचिव के तौर पर गर्ग की RBI और प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ कुछ मुद्दों पर असहमति थी।
बयान
गर्ग ने स्वीकार की थी वित्त मंत्री के साथ मतभेद की बात
नवंबर 2020 में गर्ग ने कहा था कि उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति इसलिए ली, क्योंकि विकास के लिए सरकार का सुधार एजेंडा चुनावों के बाद पटरी से उतर रहा था और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ उनके अच्छे कामकाजी संबंध नहीं थे।
उन्होंने कहा था, "सीतारमण के साथ नीतिगत मामलों पर गंभीर मतभेद हो गए थे।"
उन्होंने दावा किया कि सीतारमण ने मंत्री बनने के एक महीने के भीतर ही वित्त मंत्रालय से उनका तबादला करने की मांग की थी।
किताबें
किताबों को लेकर भी चर्चित रहे हैं गर्ग
गर्ग अपनी किताबों को लेकर भी चर्चा में रहे हैं। 2023 में गर्ग ने अपनी किताब 'वी ऑल्सो मेक पॉलिसी: एन इनसाइडर्स अकाउंट ऑफ हाउ द फाइनेंस मिनिस्ट्री फंक्शंस' में कई खुलासे किए थे।
इसमें उन्होंने लिखा कि 14 सितंबर 2018 को एक बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तत्कालीन RBI गवर्नर उर्जित पटेल पर भड़क गए थे।
इसी किताब में उन्होंने समय से पहले सेवानिवृत्ति के लिए सीतारमण को जिम्मेदार ठहराया था।