BRICS शिखर सम्मेलन: AI, सीमा पार भुगतान और ऊर्जा सुरक्षा; भारत के एजेंडे में क्या-क्या?
क्या है खबर?
भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। इस दौरान समूह के 11 सदस्य वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अहम समय के बीच जुटेंगे। भारत मंडपम में होने वाला यह शिखर सम्मेलन समूह के 20 वर्ष पूरे होने के मौके पर भी हो रहा है, जिससे भारत की अध्यक्षता का महत्व और बढ़ जाता है। आइए जानते हैं भारत के एजेंडे में क्या-क्या रह सकता है।
वैश्विक दक्षिण
एजेंडे के केंद्र में वैश्विक दक्षिण
न्यूज18 के मुताबिक, भारत का सबसे बड़ा एजेंडा BRICS का उपयोग विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक मंच के रूप में इस्तेमाल करने पर है, ताकि वैश्विक निर्णय लेने में उनकी अधिक भूमिका हो सके।
भारत मंच का इस्तेमाल संयुक्त राष्ट्र और विश्व बैंक जैसी संस्थाओं में सुधारों के लिए दबाव डालने के लिए कर सकता है। हालांकि, भारत को BRICS को एक पश्चिमी विरोधी गठबंधन बनने से रोकने के लिए सतर्क रहना होगा।
आपूर्ति श्रृंखलाएं
आपूर्ति श्रृंखलाओं की बहाली
भारत चाहता है कि BRICS देश लचीली और विविध वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं की दिशा में काम करें।
अगस्त में आयोजित BRICS व्यापार मंत्रियों की बैठक में भी भारत ने BRICS के भीतर व्यापार बढ़ाने, सेवाओं में व्यापार का विस्तार करने और लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए जोर दिया था।
रूस और ईरान युद्धों के चलते समुद्री मार्गों में रुकावट, टैरिफ और प्रतिबंधों से आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
वित्तीय सहयोग
डिजिटल भुगतान और वित्तीय सहयोग को बढ़ावा
BRICS ने हमेशा से पारंपरिक वित्तीय चैनलों पर निर्भरता कम करने और राष्ट्रीय मुद्राओं के अधिक उपयोग को प्रोत्साहित करने पर चर्चा की है।
दिल्ली में भी चर्चाओं के दौरान सीमा पार भुगतान, फिनटेक और डिजिटल वित्तीय अवसंरचना पर विचार किए जाने की उम्मीद है।
हालांकि, यहां भी ये सतर्कता बरतनी होगी कि इस दिशा में कोई भी कदम डॉलर को किसी अन्य प्रमुख मुद्रा से बदलने जैसा प्रतीत न हो।
तकनीक
तकनीक और AI पर ध्यान
भारत चाहता है कि BRICS केवल एक भू-राजनीतिक मंच बनने के बजाय तकनीकी सहयोग का माध्यम बने।
BRICS विज्ञान मंत्रियों की बैठक में भारत ने अनुसंधान अवसंरचना, ज्ञान साझाकरण और नवाचार में मजबूत सहयोग के लिए जोर दिया था।
भारत ने BRICS की अपनी अध्यक्षता के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, अनुसंधान सहयोग, नवाचार और ज्ञान साझाकरण जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है।
ऊर्जा सुरक्षा
वैश्विक तनाव के बीच ऊर्जा सुरक्षा पर फोकस
BRICS में दुनिया के कुछ सबसे बड़े तेल और गैस उत्पादक देशों के साथ-साथ उपभोक्ता भी शामिल हैं। भारत चाहता है कि समूह ऊर्जा सुरक्षा के साथ जलवायु परिवर्तन और स्वच्छ ऊर्जा पर भी ध्यान केंद्रित करे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक ऊर्जा के 'सुरक्षित, लचीले, न्यायसंगत और टिकाऊ' भविष्य के केंद्र में वैश्विक दक्षिण को रखने के भारत के प्रयासों पर प्रकाश डाला है।
दुनिया में चल रहे 2 अहम युद्धों के बीच ऊर्जा आपूर्ति केंद्र में रही है।
प्लस
अब BRICS के बारे में जानिए
BRICS प्रमुख उभरती हुए अर्थव्यवस्था वाले देशों का समूह है। 2009 में ब्राजील, रूस, भारत और चीन ने इसकी स्थापना की थी। 2011 में दक्षिण अफ्रीका भी शामिल हुआ।
2024 में समूह में मिस्र, सऊदी अरब, इथियोपिया, ईरान और UAE को जोड़ा गया। 2025 में इंडोनेशिया भी समूह से जड़ा।
BRICS देश वैश्विक जनसंख्या के 49.5 प्रतिशत, सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के 26 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं।