पेपर लीक संशोधन विधेयक पुराने विधेयक से कितना अलग, सजा और जुर्माने को लेकर क्या-क्या बदला?
क्या है खबर?
NEET पेपर लीक को लेकर चल रहे घमासान के बीच सरकार 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' लेकर आई है। 29 जुलाई को ये विधेयक लोकसभा से ध्वनि मत से पारित हो गया है। आज विधेयक पर राज्यसभा में चर्चा हुई। इसका उद्देश्य पेपर लीक, संगठित नकल माफिया और परीक्षा कराने वाली एजेंसियों की जवाबदेही तय करने के लिए कानून को और सख्त बनाना है। आइए विधेयक के अहम प्रावधान जानते हैं।
वजह
क्यों लाया गया विधेयक?
पिछले कुछ सालों में NEET और अन्य भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और संगठित परीक्षा माफिया के मामले सामने आए, जिससे परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं और प्रक्रिया प्रभावित हुई।
पेपर लीक के विरोध में देशभर में छात्र सड़कों पर उतरे।
विवाद बढ़ने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 जुलाई को घोषणा की कि सरकार पेपर लीक के खिलाफ कड़े उपायों वाला एक विधेयक लाएगी। अगले ही दिन केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विधेयक को मंजूरी दे दी।
प्रावधान
क्या हैं विधेयक के बड़े प्रावधान?
पेपर लीक में शामिल लोगों को 5 से 10 साल की सजा और 50 लाख रुपये तक जुर्माना का सामना करना पड़ेगा।
वहीं, संगठित अपराध के मामले में कम से कम 7 साल सजा और 10 करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।
इसी तरह सेवा प्रदाताओं के लिए 5 करोड़ रुपये जुर्माना और 5 साल की सजा और सार्वजनिक परीक्षा से जुड़ी कोई भी जिम्मेदारी सौंपने पर 8 साल की रोक जैसे प्रावधान शामिल हैं।
फास्ट ट्रैक
फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी सुनवाई
सजा और जुर्माने को बढ़ाने के अलावा विधेयक में अपराधों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का प्रावधान है। विधेयक के तहत, फास्ट ट्रैक कोर्ट को ऐसे अपराधों की सुनवाई चार्जशीट दायर होने के 3 महीने के भीतर करनी होगी।
विधेयक केंद्र सरकार को अपराधों की जांच के लिए एक स्पेशल टास्क फोर्स बनाने की शक्ति भी देता है।
सरकार को ऐसे मामलों की पैरवी के लिए स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त करने का अधिकार मिला है।
पिछला कानून
पिछले विधेयक से कितना अलग है नया विधेयक?
नए विधेयक में पिछले विधेयक के सजा और जुर्माने के प्रावधान को सख्त किया गया है।
पिछले विधेयक में दोषियों को केवल 3 से 5 साल तक की सजा का प्रावधान था। वहीं, संगठित अपराध के मामले में 5 से 10 साल की जेल और एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगता था।
सुनवाई और जांच को लेकर भी कोई समय सीमा निर्धारित नहीं थी। साथ ही अपराधों का विस्तृत वर्गीकरण भी नहीं था।
परीक्षाएं
किन परीक्षाओं पर लागू होगा नया विधेयक?
यह कानून केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं पर लागू होगा। इनमें UPSC, SSC, रेलवे भर्ती बोर्ड और IBPS जैसी परीक्षाएं शामिल हैं।
इसके अलावा राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) जिन परीक्षाओं को करवाता है, जैसे NEET, JEE और CUET आदि पर भी नया विधेयक लागू होगा।
2024 से पहले पेपर लीक से जुड़े मामलों में अलग-अलग राज्यों के कानून के हिसाब से कार्रवाई होती थी। कोई एक समान केंद्रीय कानून नहीं था।