क्या था दिल्ली की शराब नीति का मामला, जिसमें बरी किए गए केजरीवाल और सिसोदिया?
क्या है खबर?
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शराब नीति के 4 साल पुराने मामले में शुक्रवार (27 फरवरी) को आम आदमी पार्टी (AAP) संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत अन्य आरोपियों को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ आरोप सिद्ध करने के लिए सबूत पर्याप्त नहीं हैं और बिना सबूतों के आरोप सिद्ध नहीं हो सकता है। ऐसे में उन्हें बरी किया जा रहा है। आइए इस पूरे मामले पर नजर डालते हैं।
शुरुआत
कैसे शुरू हुई थी कहानी?
सिसोदिया ने सितंबर, 2020 में नई शराब नीति बनाने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। इस समिति ने लोगों और विशेषज्ञों से मिले सुझाव के बाद अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। इसके बाद सिसोदिया की अध्यक्षता में तत्कालीन शहरी विकास मंत्री सत्येंद्र जैन और राजस्व मंत्री कैलाश गहलोत की अध्यक्षता में एक मंत्री समूह का गठन किया गया। 22 मार्च, 2021 को इस मंत्री समूह ने नई शराब नीति को मंजूरी दी थी।
नीति
7 नवंबर, 2021 को लागू हुई थी शराब नीति
दिल्ली सरकार ने 7 नवंबर, 2021 को शराब नीति लागू कर दी थी। इससे शराब की सभी दुकानें निजी ठेके पर चली गईं। 8 जुलाई, 2022 को मुख्य सचिव नरेश कुमार ने नीति में गड़बड़ी का अंदेशा जताते हुए उपराज्यपाल वीके सक्सेना रिपोर्ट भेज दी। इसमें सिसोदिया पर शराब कारोबारियों को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया गया। 22 जुलाई, 2022 को उपराज्यपाल ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच की सिफारिश करते हुए गृह मंत्रालय को पत्र लिख दिया।
विवाद
विवाद के बाद दिल्ली सरकार ने रद्द की नीति
विवाद बढ़ता देख दिल्ली सरकार ने 28 जुलाई, 2022 को नई शराब नीति को रद्द कर दिया। इसके बाद 17 अगस्त, 2022 को CBI ने 15 अभियुक्तों के खिलाफ मामला दर्ज किया। इसमें सिसोदिया, 3 सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी, 9 व्यापारी और 2 कंपनियों शामिल थीं। CBI ने आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के आरोप लगाए। 22 अगस्त को CBI की FIR के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में मामला दर्ज कर लिया।
आरोप
शराब नीति में क्या थे बड़े आरोप?
ED का आरोप था कि शराब कंपनियों और 'दक्षिण समूह' को फायदा पहुंचाने के लिए दिल्ली सरकार ने नीति में बदलाव किए और इसके बदले कंपनियों और 'दक्षिण समूह' ने AAP को 100 करोड़ रुपये रिश्वत दी था। सिसोदिया पर कमीशन लेकर शराब की दुकानों का लाइसेंस लेने वालों को अनुचित फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया गया था। केजरीवाल पर मुख्य आरोपियों में शामिल समीर महेंद्रू से वीडियो कॉल पर बात करने और मामले में मिलिभगत करने का आरोप था।
गिरफ्तारी
CBI ने फरवरी 2023 में सिसोदिया को किया गिरफ्तार
19 अगस्त, 2022 को CBI ने सिसोदिया के घर समेत 7 राज्यों में 21 ठिकानों पर छापेमारी की। 28 सितंबर, 2022 को इंडोस्पिरिट कंपनी के प्रबंध निदेशक समीर महेंद्रू, कारोबारी और AAP के पदाधिकारी विजय नायर को ED ने गिरफ्तार किया। इस दौरान सिसोदिया पर भी शिकंजा कसता गया। आखिरकार 26 फरवरी, 2023 को लंबी पूछताछ के बाद CBI ने सिसोदिया को गिरफ्तार कर लिया। एक हफ्ते बाद ही ED ने भी जेल से ही सिसोदिया को गिरफ्तार कर लिया।
आंच
केजरीवाल तक पहुंची जांच की आंच
2 नवंबर, 2023 को इसी मामले में ED ने केजरीवाल को पहला समन जारी किया। 17 मार्च, 2024 तक केजरीवाल को 9 समन भेजे गए, लेकिन वे पूछताछ के लिए पेश नहीं हुए। ऐसे में 21 मार्च, 2024 को ED ने लंबी पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया। हिरासत के दौरान CBI ने भी उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इस दौरान सिसोदिया ने सेशन और हाई कोर्ट में जमानत याचिका दायर करने के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
जमानत
530 दिन बाद सिसोदिया को मिली जमानत
सिसोदिया की याचिका पर 29 जुलाई, 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने ED और CBI को नोटिस भेजकर जवाब मांगा। 6 अगस्त को कोर्ट ने जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा और 9 अगस्त को सिसोदिया को जमानत दे दी। कोर्ट ने उस दौरान निचली अदालतों की कार्यप्रणाली पर भी सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि जमानत के मामले में हाई कोर्ट और ट्रायल कोर्ट सुरक्षित खेल रहे हैं। इसे किसी भी सूरत में सही नहीं ठहराया जा सकता है।
राहत
केजरीवाल को 10 मई, 2024 को मिली थी अंतरिम जमानत
केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी, लेकिन 9 अप्रैल को उसे खारिज कर दिया गया। उन्होंने 10 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, लेकिन राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट ने 10 मई को उन्हें लोकसभा चुनावों के लिए 1 जून तक अंतरिम जमानत दे दी। 2 जून को केजरीवाल ने आत्मसमर्पण कर दिया। 20 जून को उन्हें निचली अदालत से जमानत मिली, लेकिन ED की याचिका पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दी।
गिरफ्तारी
ED के बाद CBI ने जेल से केजरीवाल को किया गिरफ्तार
26 जून को भ्रष्टाचार के मामले में CBI ने केजरीवाल को जेल से गिरफ्तार कर लिया। केजरीवाल ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। 12 जुलाई को ED वाले मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई। हालांकि, केजरीवाल बाहर नहीं आ पाए, क्योंकि CBI वाले मामले में उन्हें जमानत नहीं मिली थी। केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में गिरफ्तारी को चुनौती दी।5 सितंबर को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा और 13 सितंबर, 2024 को उन्हें जमानत दे दी।
गिरफ्तारियां
मामले में इन बड़े नेताओं की भी हुई गिरफ्तारी
इस मामले में सिसोदिया और केजरीवाल के अलावा ED ने सितंबर 2022 में AAP के कम्युनिकेशन विभाग के मुखिया विजय नायर को गिरफ्तार किया था। उसके बाद अक्टूबर, 2023 में AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह को भी गिरफ्तार कर पूछताछ की थी। इसी तरह मार्च 2024 में भारत राष्ट्र समिति (BRS) नेता के कविता को भी ED ने गिरफ्तार कर उनसे गहन पूछताछ की थी। हालांकि, बाद में इन सभी नेताओं को जमानत मिल गई।
सुनवाई
कोर्ट ने आरोप तय करने के लिए 12 फरवरी को पूरी की थी सुनवाई
इस मामले में CBI की ओर से लगातार आरोप लगाते हुए गवाह और सबूत पेश किए जा रहे थे। इसी तरह केजरीवाल और सिसोदिया समेत अन्य आरोपियों का पक्ष भी देखा जा रहा था। मामले में आरोप तय करने के लिए राउज ऐवेन्यू कोर्ट ने 12 फरवरी, 2026 को सुनवाई करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था। उसके बाद कोर्ट ने आज (27 फरवरी) फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया और CBI की जांच पर सवाल उठाए।