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क्या है ICG में शामिल किए गए पहले स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण जहाज 'समुद्र प्रताप' की खासियत? 
भारतीय तट रक्षक बल में शामिल किया गया पहला स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण जहाज 'समुद्र प्रताप'

क्या है ICG में शामिल किए गए पहले स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण जहाज 'समुद्र प्रताप' की खासियत? 

Jan 05, 2026
12:51 pm

क्या है खबर?

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत के साथ वास्को स्थित गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) में भारतीय तट रक्षक बल (ICG) के नए जहाज ICGS 'समुद्र प्रताप' को कमीशन किया। यह भारत का पहला स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण जहाज है। समारोह में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, ICG महानिदेशक परमेश सिवमणि समेत कई उच्चाधिकारी शामिल थे। आइए जानते हैं 'समुद्र प्रताप' की खासियत क्या है और यह किस तरह ICG के लिए उपयोगी साबित होगा।

ट्विटर पोस्ट

यहां देखें जहाज को कमीशन किए जाने का वीडियो

बयान

राजनाथ ने 'समुद्र प्रताप' को लेकर क्या कहा?

राजनाथ ने 'समुद्र प्रताप' को कमीशन किए जाने के बाद कहा, "इस जहाज में इस्तेमाल 60 प्रतिशत से अधिक सामग्री स्वदेशी है। यह अपने आप में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत कदम है। हमारी 'मेक इन इंडिया' पहल का सही अर्थ इस तरह की परियोजनाओं में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।" यह शुभारंभ राजनाथ की गोवा की 2 दिवसीय यात्रा का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भारत की समुद्री सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण क्षमताओं को मजबूत करना है।

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महत्व

जहाज का नाम और महत्व

'समुद्र प्रताप' का अर्थ है समुद्र की महिमा। यह जहाज समुद्र को सुरक्षित, स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त रखने का काम करेगा। यह GSL द्वारा बनाए गए दो PCV जहाजों में से पहला है। पूरी डिजाइन, निर्माण और तकनीक भारत में हुई है, जिसमें 60 प्रतिशत से ज्यादा हिस्से स्वदेशी हैं। यह जहाज भारत की समुद्री क्षमताओं को और अधिक मजबूत करने के साथ रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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खासियत

क्या है 'समुद्र प्रताप' की खासियत?

'समुद्र प्रताप' जहाज की लंबाई 114.5 मीटर और चौड़ाई 16.5 मीटर है। इसका कुल वजन करीब 4,200 टन है। इसकी अधिकतम गति लगभग 22 समुद्री मील या 40 किमी/घंटा की है। यह जहाज समुद्र में लगभग 11,000 किलोमीटर तक बिना रुके चल सकता है। यह समुद्री प्रदूषण नियंत्रण नियमों को लागू करने, खोज एवं बचाव अभियानों में भाग लेने और भारत के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इंजन

जहाज में किया गया है 2 इंजन का इस्तेमाल

इस जहाज में 7,500 किलोवाट के 2 डीजल इंजन हैं। इसमें स्वदेशी कंट्रोलेबल पिच प्रोपेलर (CPP) और गियरबॉक्स का इस्तेमाल किया गया है। इसमें लगे डायनामिक पोजिशनिंग (DP), इंटीग्रेटेड ब्रिज सिस्टम (IBS), इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम (IPMS), ऑटोमेटेड पावर मैनेजमेंट सिस्टम (APMS) जहाज को पूरी तरह स्वचालित और कुशल बनाते हैं। इस जहाज में 30mm CRN-91 तोप, एकीकृत अग्नि नियंत्रण प्रणाली से लैस दो 12.7mm स्थिर रिमोट-नियंत्रित तोपें भी लगी हैं।

अन्य

तेल रिसाव और अन्य प्रदूषण से निपटने में कारगर है जहाज

यह जहाज खास तौर पर समुद्र में तेल रिसाव (ऑयल स्पिल) या अन्य प्रदूषण से निपटने के लिए बनाया गया है। इसमें साइड स्वीपिंग आर्म्स, ऑयल फिंगरप्रिंटिंग मशीन, जाइरो-स्टेबिलाइज्ड स्टैंडऑफ एक्टिव केमिकल डिटेक्टर, फ्लोटिंग बूम्स, हाई कैपेसिटी स्किमर्स, पोर्टेबल बार्जेस और प्रदूषण नियंत्रण लैबोरेटरी बनाई गई है। इसमें दूसरे जहाजों पर आग बुझाने की क्षमता के लिए एक्सटर्नल फायर फाइटिंग सिस्टम (Fi-Fi Class 1) की सुविधा भी दी गई है।

आधार

कोच्चि होगा जहाज का आधार केंद्र

जहाज का आधार केंद्र कोच्चि होगा। यह पश्चिमी क्षेत्र के कमांडर के अधीन काम करेगा। उपमहानिरीक्षक अशोक कुमार भामा को कमांडिंग ऑफिसर के रूप में तैनात किया गया हैं। जहाज पर कुल 14 अधिकारी और 115 जवान हैं। खास बात यह है कि पहली बार इस जहाज पर दो महिला अधिकारी नियुक्त की गई हैं। वे पुरुष साथियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सभी ड्यूटी निभाएंगी। यह तटरक्षक बल में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का प्रतीक है।

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