आवश्यक वस्तु अधिनियम क्या है और यह रसोई गैस किल्लत से निपटने में कैसे करेगा मदद?
क्या है खबर?
इजरायल-अमेरिका और ईरान युद्ध 11वें दिन में पहुंच गया है। इसके चलते देशों को तेल और गैस की आपूर्ति में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। इससे कीमतें आसमान छू रही हैं और देश इससे निपटने के लिए विभिन्न उपाय अपना रहे हैं। भारत भी इससे अछूता नहीं है। केंद्र सरकार ने तेल संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य के लगभग ठप होने के बाद तेल और रसोई गैस संकट से निपटने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 लागू किया है।
किल्लत
देश में देखी जा रही है रसोई गैस की किल्लत
भारत में रसोई गैस की किल्लत देखी जा रही है। बुकिंग के एक सप्ताह बार भी लोगों को सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं। देश के विभिन्न हिस्सों में रसोई गैस के लिए एजेंसियों के बाहर लोगों की लंबी कतारें लगना शुरू हो गया है। इसके चलते घरेलू सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये और व्यावसायिक सिलेंडर की कीमत में 115 रुपये की बढ़ोतरी हो गई है। कर्नाटक और महाराष्ट्र में होटल और रेस्टोरेंट उद्योग बंद होने के कगार पर हैं।
अधिनियम
क्या है आवश्यक वस्तु अधिनियम?
संसद द्वारा 1955 में पारित और संविधान की अनुसूची IX में सूचीबद्ध, आवश्यक वस्तु अधिनियम सरकार द्वारा यह सुनिश्चित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है कि आम आदमी के लिए आवश्यक रोजमर्रा की वस्तुएं उचित कीमतों पर उपलब्ध रहें। इस कानून के माध्यम से सरकार आवश्यक वस्तुओं की कीमत, उत्पादन, आपूर्ति, वितरण और व्यापार को विनियमित कर सकती है। इससे युद्ध, प्राकृतिक आपदा और आपूर्ति में व्यवधान जैसे संकटों में जमाखोरी और मुनाफाखोरी पर भी लगाम कसती है।
वस्तु
आवश्यक वस्तुओं में क्या-क्या शामिल हैं?
अधिनियम में आवश्यक वस्तु को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया है। धारा 2(A) के अनुसार आवश्यक वस्तु से तात्पर्य अधिनियम की अनुसूची में निर्दिष्ट वस्तुओं से है। वर्तमान में इस सूची में दवाइयां, उर्वरक, खाद्य तेल समेत सभी खाद्य पदार्थ, पूरी तरह से कपास से बना हैंक यार्न, पेट्रोलियम और पेट्रोलियम उत्पाद, कच्चा जूट और जूट वस्त्र, खाद्य फसलों के बीज, फल और सब्जियों के बीज, पशु चारा, जूट और कपास के बीज शामिल हैं।
जानकारी
सरकार ने साल 2020 में किसा था अहम संशोधन
सरकार ने साल 2020 में अधिनियम में एक संशोधन कर इसमें असाधारण मूल्य वृद्धि, युद्ध, अकाल और गंभीर प्राकृतिक आपदाओं के दौरान अनाज, दालें, तिलहन, खाद्य तेल, प्याज और आलू की कीमतों को विनियमित करने का अधिकार शामिल किया था।
कारण
केंद्र सरकार ने यह अधिनियम क्यों लागू किया है?
पश्चिम एशिया में युद्ध के परिणामस्वरूप उत्पन्न हुई स्थिति को ध्यान में रखते हुए सरकार ने तेल और रसोई गैस की संभावित कमी को दूर करने के लिए यह अधिनियम लागू किया। भारत ने वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान 3.13 करोड़ टन रसोई गैस की खपत की थी, जिसमें से 1.28 करोड़ टन का उत्पादन देश में हुआ था। साफ है कि देश की शेष आवश्यकताएं आयात से पूरी की जाती हैं, जो युद्ध के कारण प्रभावित हो सकती हैं।
उद्देश्य
क्या है इस अधिनियम को लागू करने का उद्देश्य?
न्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार, अधिनियम लागू करके सरकार यह संकेत दे रही है कि व्यवधान बढ़ने की स्थिति में वह ईंधन की आपूर्ति और वितरण को सक्रिय रूप से प्रबंधित करने के लिए तैयार है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य कमी को रोकना, बाजार को स्थिर करना और यह सुनिश्चित करना है कि युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता आने पर भी आवश्यक क्षेत्रों और उपभोक्ताओं को निर्बाध ईंधन आपूर्ति मिलती रहे।
बदलाव
अधिनियम लागू होने से क्या बदलाव प्रभावी हुए?
सरकार ने अधिनियम लागू करते हुए सभी तेल शोधन कंपनियों और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMC) को LPG का उत्पादन बढ़ाने और निर्बाध आपूर्ति को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है। सभी रिफाइनरों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके द्वारा उत्पादित प्रोपेन और ब्यूटेन का पूरा उपयोग LPG बनाने में किया जाए। उत्पादित LPG केवल इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों को ही दी जाएगी।
पृष्ठभूमि
क्या सरकार ने पहले कभी किया है अधिनियम का प्रयोग?
सरकार ने आखिरी बार अगस्त 2025 में व्यापारियों/थोक विक्रेताओं के लिए गेहूं के स्टॉक की सीमा को 3,000 मीट्रिक टन (MT) से घटाकर 2,000 मीट्रिक टन करने के लिए इस अधिनियम का उपयोग किया था। इसी तरह दिसंबर 2023 में केंद्र ने गेहूं के भंडार के लिए इस अधिनियम को लागू किया था। अगस्त 2022 में सरकार ने इसे लागू कर राज्यों से व्यापारियों के पास उपलब्ध तुअर दाल के स्टॉक की निगरानी और सत्यापन करने को कहा था।