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पश्चिम बंगाल में अवैध प्रवासियों को निकालने के लिए शुरू की गई '3D' नीति क्या है?
पश्चिम बंगाल में अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू होते ही बांग्लादेश सीमा पर लोगों की भीड़ जुटने लग गई है

पश्चिम बंगाल में अवैध प्रवासियों को निकालने के लिए शुरू की गई '3D' नीति क्या है?

May 29, 2026
06:22 pm

क्या है खबर?

पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में पहली बार भाजपा की सरकार बनने के साथ ही वहां रहने वाले अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों में हड़कंप मच गया है। राज्य सरकार ने अवैध प्रवासियों को बाहर निकलाने के लिए अपनी '3D' नीति (पता लगाओ, हटाओ और निवार्सित करो) के तहत कार्रवाई तेज कर दी है। इससे भारत-बांग्लादेश सीमा के विभिन्न हिस्सों में भारी भीड़ जमा होने लगी है। आइए जानते हैं सरकार की यह '3D' नीति क्या है।

नीति

क्या है सरकार की '3D' नीति?

चुनाव से पहले भाजपा ने घुसपैठ को अहम चुनावी मुद्दा बनाया था। भाजपा का कहना था कि बांग्लादेश से लोगों का आगमन राज्य के लिए बड़ा सुरक्षा और जनसांख्यिकीय खतरा है। इसके बाद भाजपा ने 4 मई को चुनाव जीतकर सत्ता हासिल करते ही अपना वादा पूरा करने की ओर कदम बढ़ा दिया। अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही अवैध घुसपैठियों के मामले में 'पता लगाने, हटाने और निर्वासित करने' के रूप में '3D' नीति लागू कर दी।

बयान

मुख्यमंत्री अधिकारी ने क्या दिया था बयान?

मुख्यमंत्री अधिकारी ने 20 मई को कहा, "नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के दायरे में न आने वाले लोग पूरी तरह अवैध घुसपैठिए हैं। राज्य पुलिस उन्हें गिरफ्तार करके सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंप देगी। BSF बांग्लादेश सीमा रक्षक बल (BDR) से बातचीत करेगी और उन्हें निर्वासित करने का प्रयास करेगी। उन्हें चले जाना चाहिए। वे बांग्लादेशी हैं। उनकी सरकार को उन्हें स्वीकार करना चाहिए। वे हमारे रिश्तेदार नहीं हैं, जो हम उनके रहने और खाने का का खर्चा उठाएंगे।"

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कार्रवाई

'3D' नीति के तहत कैसे की जा रही है कार्रवाई?

'3D' नीति के तहत अधिकारी अवैध रूप से देश में प्रवेश करने वालों का पता लगाएंगे, फिर डाटाबेस से उनका नाम हटाएंगे और उन्हें तुरंत निर्वासित कर देंगे। इसके तहत सरकार ने राज्य भर में 11 हिरासत केंद्र स्थापित किए हैं। PTI के अनुसार, शुक्रवार तक इन केंद्रों में 335 बंदियों को रखा गया था, जिनमें 148 पुरुष, 99 महिलाएं और 88 बच्चे शामिल हैं। इनमें सबसे अधिक संदिग्ध बांग्लादेशी उत्तरी 24 परगना जिले के बसीरहाट में पकड़े गए हैं।

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केंद्र

राज्य में कहां-कहां बनाए गए हैं हिरासत केंद्र?

सरकार ने बारुईपुर, सुंदरबन, बशीरहाट, बोनगांव, बारासात, मुर्शिदाबाद, जंगीपुर और कृष्णानगर, मालदा, कूच बिहार और दक्षिण दिनाजपुर जिलों में ये हिरासत केंद्र खोले हैं। मुख्यमंत्री अधिकारी ने राज्य के पुलिस अधिकारियों को निर्वासन प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया है और कहा है कि स्वदेश वापसी से पहले अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को अदालत में भेजने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्हें हिरासत में लेकर सीधे BDR से वार्ता करते हुए उन्हें सीमा पार ही भेजना है।

हालात

बंगाल-बांग्लादेश सीमा पर लंबी अवैध प्रवासियों की कतारें

पकड़े जाने के डर से कई बांग्लादेशी सीमा पार करने की उम्मीद से भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा की तरह बढ़ रहे हैं। 25 मई से पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में BSF की हकीमपुर चौकी पर भारी भीड़ देखी जा रही है। भारत छोड़ने का इंतजार कर रहे एक व्यक्ति ने ANI से कहा, "यहां इस समय बहुत अशांति फैली हुई है। हमें कोई काम नहीं मिल रहा है। बांग्लादेश से आए हुए हमें दो-तीन साल हो गए हैं।"

बयान

बांग्लादेश जाने को तैयार लोगों ने क्या कहा?

बांग्लादेश जाने के लिए सीमा पर खड़े लोगों में शामिल एक अन्य प्रवासी ने हिंदुस्तान टाइम्स से कहा, "हम वापस जा रहे हैं। अगर सरकार ने हमें पकड़ भी लिया होता तो भी हमें वापस भेज देती। हमें एक आदमी 2-3 साल पहले काम दिलाने के नाम पर यहां लाया था, लेकिन अब न तो कोई हमें काम दे रहा है और न ही रहने को जगह मिल रही है। ऐसे में अब वापस बांग्लादेश लौटना ही एकमात्र रास्ता है।"

ट्विटर पोस्ट

यहां देखें बांग्लादेश सीमा पर जमा लोगों की भीड़

पृष्ठभूमि

पश्चिम बंगाल में लंबे समय से है अवैध अप्रवासन की समस्या

पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश के साथ 2,216 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है, जिसमें से लगभग 550 किलोमीटर का हिस्सा बिना बाड़ के है। इसके चलते बेहतर रोजगार के अवसरों की तलाश में बांग्लादेश से अवैध प्रवासियों की भारी आमद हुई है। साल 2011, 2001, 1991 और 1981 की पिछली 4 जनगणनाओं के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि डेढ़ करोड़ से अधिक बांग्लादेशी और रोहिंग्या भारत आ चुके हैं। यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती है।

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