केंद्र सरकार ने लागू किया 'एक अधिकारी, एक सरकारी कार' का नियम, जानिए क्या है ये
क्या है खबर?
केंद्र सरकार ने खर्च पर लगाम लगाने और जवाबदेही बढ़ाने के लिए एक नई नीति लागू की है। नीति के तहत अब केंद्र के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को एक ही आधिकारिक वाहन का उपयोग करने की अनुमति होगी। भले ही वे, कई मंत्रालयों या विभागों का कार्यभार संभाल रहे हो। इस नीति को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार का चिरपरिचित अंदाज 'एक अधिकारी, एक सरकार कार' नीति बताया जा रहा है। आइए, इसके बारे में जानते हैं।
आदेश
किसने जारी किया है आदेश?
वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने 28-29 जुलाई को कार्यालय ज्ञापन जारी सभी केंद्रीय मंत्रालयों-विभागों को अधिकारियों की कारों के उपयोग संबंधी संशोधित दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन का निर्देश दिया है।
नए नियमों के अनुसार, जिस अधिकारी को पहले से सरकारी कार मिली है, उसे अन्य मंत्रालय-विभाग, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, स्वायत्त निकायों या अर्ध-सरकारी संगठनों का अतिरिक्त प्रभार मिलने मात्र से दूसरा वाहन नहीं मिलेगा।
सरकार इससे पहले सितंबर 2022 में भी ऐसा आदेश जारी कर चुकी है।
आदेश
इस आदेश का क्या है मतलब?
आदेश का साफ मतलब है कि एक अधिकारी को अब केवल एक सरकारी कार मिलेगी।
अगर किसी अधिकारी को अपने मुख्य पद के लिए सरकारी कार मिली है तो वह उसी का उपयोग करेगा।
अगर उसे दूसरा मंत्रालय या विभाग का कार्यभार मिलता है तो उसके लिए उसे दूसरी कार नहीं मिलेगी, बल्कि मुख्य पद के लिए आवंटित कार का ही उपयोग करना होगा।
यही नहीं, अधिकारी कार का उपयोग सिर्फ अपनी मौजूदगी में सरकारी ड्यूटी-दौरे के लिए कर सकेगा।
नियम
इससे पहले 2022 के आदेश में क्या था?
सरकार ने सितंबर, 2022 में इस संबंध में जो आदेश दिया था उसमें सरकारी कार के लिए संयुक्त सचिव, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, विभागाध्यक्ष को पात्र बताया था।
कार मिलने पर अधिकारियों को 15,750 रुपये परिवहन भत्ता न देने की बात थी। कार का इस्तेमाल सिर्फ सरकारी काम के लिए करने को कहा था।
निजी उपयोग के लिए कुछ शर्तों के साथ 500 किमी प्रति महीना तक छूट है।
पहले दूसरे विभागों की गाड़ियां भी आधिकारिक दौरे पर इस्तेमाल होती थी।
आदेश
'एक अधिकारी, एक सरकारी कार' से सरकार को कैसे मिलेगा फायदा?
सरकार ने जो 'एक अधिकारी, एक सरकारी कार' नियम लागू किया है, उसका आधार 2022 का आदेश है, जिसे और सख्ती से लागू किया गया है।
इस नीति से केंद्र सरकार को गाड़ियों के ईंधन, ड्राइवर, रखरखाव और कार खरीद के खर्च पर अतिरिक्त पैसा नहीं बहाना पड़ेगा।
पहले कोई अधिकारी अतिरिक्त प्रभार पाते ही एक से अधिक कार रखते थे और न होने पर खरीदते थे, उस पर लगाम लगेगी।
जवाबदेही बढ़ेगी और गाड़ियों का गलत-फिजूल खर्च रुकेगा।