पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन फिर क्यों हुए गिरफ्तार, क्या है जल बोर्ड से जुड़ा कथित घोटाला?
क्या है खबर?
दिल्ली सरकार में पूर्व मंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता सत्येंद्र जैन को भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) ने बीती रात गिरफ्तार कर लिया है। दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) टेंडर में घोटाले के आरोप में यह गिरफ्तारी हुई है। जैन के साथ 5 अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है। जैन पहले भी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल जा चुके हैं। आइए अब नया मामला समझते हैं।
घोटाला
क्या है DJB से जुड़ा कथित घोटाला?
रिपोर्ट के मुताबिक, मामला दिल्ली में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स को अपग्रेड और उनकी क्षमता बढ़ाने के लिए जारी किए गए टेंडरों में कथित गड़बड़ी से जुड़ा है।
आरोप है कि टेंडर की शर्तों में हेरफेर की गई और ऐसी परिस्थितियां बनाई गईं, जिससे कुछ खास कंपनियों को फायदा मिला। जब ये कथित घोटाला हुआ, तब जैन दिल्ली के जल मंत्री थे।
दिल्ली सरकार के सतर्कता निदेशालय की शिकायत के आधार पर मामले में 2024 में FIR दर्ज की गई थी।
गिरफ्तारी
घोटाले में किन-किन लोगों के नाम सामने आए?
घोटाले में जैन के अलावा IAS अधिकारी उदित प्रकाश राय, अंकित श्रीवास्तव, राजा कुमार कुर्रा, नागेंद्र यादव और पंकज वर्मा के भी नाम सामने आए हैं।
घोटाले के समय उदित प्रकाश जल बोर्ड के CEO, जबकि अंकित संविदा पर जल बोर्ड के सलाहकार थे।
इसके अलावा नागेंद्र, राजा कुमार और पंकज वर्मा 3 अलग-अलग कंपनियों से जुड़े हुए हैं, जो टेंडर प्रक्रिया में शामिल हुई थीं।
रिश्वत
1.52 करोड़ रुपये रिश्वत लेने के आरोप
आरोप है कि उदित प्रकाश ने गलत तरीके से लाभ पहुंचाने के लिए 1.52 करोड़ रुपये रिश्वत ली थी। ये रिश्वत मेसर्स सृजनहार और मेसर्स AN एंटरप्राइजेज नामक बिचौलिए संस्थाओं के माध्यम से रिश्वत ली गई। आरोपी नागेंद्र के स्वामित्व वाली फर्म के बैंक खाते में बड़ी रकम ट्रांसफर की गई थी।
इलेक्ट्रॉनिक सूबत में सामने आया है कि चुनिंदा कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए बाहरी लोगों से भी चर्चा हुई थी।
जांच
जांच में और क्या-क्या सामने आया?
जांच में सामने आया कि उदित ने नागेंद्र की फर्म से अपने और रिश्तेदारों के बैंक खातों में 1.52 करोड़ रुपये की रिश्वत ली। फिर इस राशि से अचल संपत्ति खरीदी।
यह रकम तकनीक मुहैया कराने वाली कंपनी मेसर्स यूरोटेक से मेसर्स AN एंटरप्राइजेज के जरिए भेजी गई।
जांच में ये भी सामने आया कि राजा, नागेंद्र और अंकित लगातार संपर्क में थे और टेंडर की शर्तों और अन्य मुद्दों पर बातचीत कर रहे थे।
टेंडर राशि
टेंडर राशि भी बढ़ाने के आरोप
10 STP के अपग्रेडेशन के लिए टेंडर जारी किया गया था, लेकिन चुनिंदा कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए नियम बदले गए। इसके बाद सिर्फ 3 कंपनियों ने बोली लगाई।
काम के लिए 4 टेंडर जारी किए गए थे, जिनकी शुरुआती लागत 1,546 करोड़ रुपये थी। हालांकि, 3 कंपनियों को टेंडर मिलने के बाद टेंडर राशि बढ़ाकर 1,943 करोड़ रुपये कर दी गई। आरोप है कि इससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ।