क्या है बाज बटालियन, इससे ड्रोन युद्ध में कैसे बढ़ेगी भारतीय सेना की ताकत?
क्या है खबर?
आधुनिक समय में युद्ध के बदलते तरीकों के लिए खुद को ढालने की दिशा में भारतीय सेना बड़ा कदम उठाने जा रही है। सेना अब ड्रोन को एकीकृत करने की दिशा में सबसे बड़ा कदम उठा रही है, जिन्हें बाज बटालियन कहा जाएगा। ये खास ड्रोन समर्पित इकाइयां विभिन्न मोर्चों पर निरंतर हवाई निगरानी, सटीक हमले और युद्ध के लिए जिम्मेदार होंगी। आइए इनके बारे में जानते हैं।
बटालियन
क्या है बाज बटालियन?
नई बाज बटालियनें विशेष ड्रोन युद्ध इकाइयां होंगी, जो मानवरहित हवाई अभियानों के हर काम को पूरा करने में सक्षम होंगी। सेना की मौजूदा ड्रोन टुकड़ियों के विपरीत, बाज बटालियनों को विशेष, स्वतंत्र संरचनाओं के रूप में डिजाइन किया जा रहा है जो पूरी तरह से मानवरहित हवाई अभियानों पर केंद्रित हैं। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बताया कि ये बटालियन मौजूदा रिमोटली पाइलटेड एयरक्राफ्ट (RPA) फ्लाइट्स पर आधारित होंगी।
काम
क्या होगा बाज बटालियन का काम?
बाज बटालियन का मुख्य काम संवेदनशील सीमाओं पर निगरानी को और ज्यादा मजबूत करना है। यह ड्रोन युद्ध के लिए सेना की तैयारियों को पुख्ता करेगी और फ्रंटलाइन यूनिट्स व खुफिया सिस्टम के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करेगी। सेना के अधिकारियों के अनुसार, ये बटालियनें निरंतर खुफिया निगरानी, लंबी दूरी की हवाई निगरानी, ड्रोन हमले, तोपखाने और मिसाइल इकाइयों के साथ समन्वय, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और काउंटर-ड्रोन प्रणालियों के साथ एकीकरण और अभियानों के दौरान पैदल सेना की मदद करेंगी।
उद्देश्य
ड्रोन प्रणाली का एकीकरण बड़ा उद्देश्य
आधुनिक सेनाओं में एक तरह के ड्रोन के बजाय निगरानी, रसद पहुंचाने वाले और हमला करने वाले ड्रोन का एक मिश्रित बेड़ा होता है। जब दर्जनों ड्रोन साथ उड़ान भरते हैं, तो इनसे मिलने वाले डेटा को रियल टाइम में प्रोसेस करना बड़ी चुनौती है। बाज बटालियन इस पूरे सिस्टम के लिए एक मुख्य नियंत्रण केंद्र का काम करेगी। ड्रोन उड़ाना एक जटिल तकनीकी युद्ध-कौशल है। बाज बटालियन अलग-अलग यूनिट्स के लिए ड्रोन प्रशिक्षण को मानकीकृत करने की जिम्मेदारी निभाएगी।
वजह
क्यों उठाया गया यह कदम?
रिपोर्ट के मुताबिक, सेना ने रूस-यूक्रेन युद्ध, चीन के साथ तनाव और पाकिस्तान के खिलाफ 'ऑपरेशन सिंदूर' से सबक लेते हुए यह पहल की है। इन युद्धों में ड्रोन की भूमिका बेहद अहम साबित हुई थी। ईरान ने भी अमेरिका-इजरायल के खिलाफ युद्ध में ड्रोनों का जमकर इस्तेमाल किया। सेना का मानना है कि ड्रोन को महज एक सहायक क्षमता मानने के बजाय इन विस्तारित भूमिकाओं के लिए विशेष कर्मियों, उपकरणों और कमान संरचनाओं वाले समर्पित संगठनों की जरूरत है।
संख्या
सेना के पास 50,000 से ज्यादा ड्रोन
भारतीय सेना की ड्रोन क्षमता में पिछले 2 वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पहले सेना के पास केवल कुछ ड्रोन प्रणालियां थीं, वहीं जून 2026 तक यह संख्या बढ़कर 50,000 से ज्यादा हो चुकी है। सेना प्रमुख जनरल द्विवेदी ने कहा, "बाज बटालियन सेना की दूर से संचालित विमान प्रणाली की क्षमता को मजबूत करने की अहम पहल है। इन्हें मौजूदा दूर से संचालित विमान इकाइयों के आधार पर विकसित किया जाएगा।"