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फ्रांसीसी हथियार प्रणाली की हैमर मिसाइलें क्या हैं, जिनका अब भारत में किया जाएगा निर्माण?
फ्रांसीसी हथियार प्रणाली की हैमर मिसाइलों का अब भारत में भी होगा निर्माण

फ्रांसीसी हथियार प्रणाली की हैमर मिसाइलें क्या हैं, जिनका अब भारत में किया जाएगा निर्माण?

Feb 17, 2026
05:12 pm

क्या है खबर?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को मुंबई के लोक भवन में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। यह मुलाकात मैक्रों की चौथी भारत यात्रा के तहत हुई है। इसमें भारत और फ्रांस के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और भी मजबूत करने के लिए व्यापार, रक्षा सहयोग और सामरिक साझेदारी जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। इस दौरान फ्रांसीसी प्रणाली की हैमर मिसाइलों के भारत में उत्पादन को लेकर भी चर्चा हुई। आइए इसके बारे में जानते हैं।

कार्यक्रम

कैसा रहेगा मैक्रों का कार्यक्रम?

फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों की यह भारत की चौथी और मुंबई की पहली यात्रा रही है। दोनों ने दोपहर सवा 3 बजे लोक भवन में द्विपक्षीय बैठक शुरू की। शाम सवा 5 बजे दोनों नेता भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026 का उद्घाटन करेंगे और दोनों देशों के व्यापारिक नेताओं और स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं को संबोधित करेंगे। इसके बाद मैक्रों अपनी पत्नी ब्रिगिट मैक्रों के साथ नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे, जहां वे इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में हिस्सा लेंगे।

मिसाइल

क्या है हैमर मिसाइल?

बैठक में दोनों नेताओं के हैमर मिसाइलों के संयुक्त उत्पादन के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने की उम्मीद है। हैमर का पूरा नाम हाईली एजाइल मॉड्यूलर मुनिशन एक्सटेंडेड रेंज है। तकनीकी रूप से यह अपने फ्रांसीसी नाम आर्मेमेंट एयर-सोल मॉड्युलर (AASM) हैमर से अधिक लोकप्रिय है। इसके फ्रांस की सैफरान इलेक्ट्रॉनिक्स एंड डिफेंस कंपनी द्वारा विकसित किया गया है। यह हैमर एक अकेली मिसाइल न होकर तकनीकी रूप से काफी समृद्ध हथियार प्रणाली है।

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खासियत

क्या है हैमर मिसालों की खासियत?

हैमर मिसाइल मानक गैर-निर्देशित बमों को स्मार्ट, सटीक निर्देशित गोला-बारूद में बदलती है। हैमर प्रणाली के दो मुख्य घटक हैं। पहला घटक आगे की ओर लगा मार्गदर्शन अनुभाग है जो नेविगेशन और लक्ष्य निर्धारण करता है। दूसरा घटक पीछे की ओर लगा रेंज विस्तार उपकरण है, जिसमें ठोस ईंधन वाला रॉकेट बूस्टर और गतिशील पंख लगे होते हैं। इस हथियार को पहली बार 2007 में पेरिस एयर शो में AASM नाम से सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया गया था।

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बदलाव

2011 में बदला गया था मिसाइल का नाम

साल 2011 में इसका नाम बदलकर हैमर किया गया और इसे मध्यम दूरी के हवा से जमीन पर हमला करने वाले हथियार के रूप में वर्गीकृत किया गया। ग्लाइड बम के रूप में पहचान रखने वाली हैमर मिसाइल सटीक निर्देशित गोला-बारूद 70 किलोमीटर तक की रेंज रखती है और इसे 250 किलोग्राम, 500 किलोग्राम और 1,000 किलोग्राम वजन के मानक बमों में लगाया जा सकता है। यह किसी भी देश की सुरक्षा को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाती है।

डिजाइन

उच्च सटीकता और मॉड्यूलर डिजाइन है खासियत

हैमर हथियार प्रणाली अपनी उच्च सटीकता और मॉड्यूलर डिजाइन के लिए जानी जाती है, जिससे यह कई प्लेटफार्मों के लिए अनुकूल हो जाती है। फायर-एंड-फॉरगेट सिद्धांत पर काम करने वाली यह प्रणाली पहाड़ी क्षेत्रों के साथ-साथ अत्यधिक सुरक्षित बंकरों में भी प्रभावी साबित हुई है। यह प्रणाली स्थिर और गतिशील दोनों लक्ष्यों को भेद सकती है और लक्ष्य चूकने की संभावना को कम करने के लिए उन्नत नेविगेशन तकनीक का उपयोग करती है।

अनुकूलन

हैमर में है अनुकूलन की क्षमता

अपने मॉड्यूलर डिजाइन के कारण हैमर को क्लोज एयर सपोर्ट (CAS) और डीप-स्ट्राइक ऑपरेशन्स दोनों के लिए अनुकूलित किया जा सकता है, जिससे यह अत्यधिक लचीला बन जाता है। गाइडेंस किट की बदौलत नियंत्रित कोण पर प्रभाव डालने की क्षमता से सटीक मारक क्षमता बढ़ जाती है। हैमर हथियार प्रणाली को इसकी अधिक लागत के कारण ही साल 2016 में 36 राफेल लड़ाकू विमानों और हथियार पैकेज के अनुबंध से बाहर रखा गया था।

जानकारी

भारत में हैमर हथियार प्रणाली का उपयोग

भारत की ओर से चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' में हैमर हथियार प्रणाली की क्षमताओं का प्रदर्शन हुआ था। भारत द्वारा तैनात किए गए कई हथियारों में हैमर हथियार प्रणाली भी शामिल थी। इन हथियार प्रणालियों के इस्तेमाल से हमले बेहद प्रभावी साबित हुए थे।

निर्माण

अब भारत में भी होगा हैमर मशीन का निर्माण

हैमर के भारत में निर्माण के लिए भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और सैफरान इलेक्ट्रॉनिक्स एंड डिफेंस (SED) के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होंगे, जिसमें स्वदेशी उत्पादन के लिए पुणे स्थित एक निजी लिमिटेड कंपनी का गठन किया जाएगा। BEL ने स्टॉक एक्सचेंज से कहा कि वह एक उत्कृष्टता केंद्र संचालित करेगा, जो हैमर हथियार प्रणाली के गाइडेंस किट (GK) के निर्माण, आपूर्ति, रखरखाव और मरम्मत के लिए एक प्रौद्योगिकी और सहयोगी भागीदार के रूप में कार्य करेगा।

इस्तेमाल

भारतीय नौसेना के राफेल विमानों होगा हैमर प्रणाली का इस्तेमाल

संयुक्त उद्यम द्वारा विकसित हैमर्स हथियार प्रणाली का उपयोग भारतीय नौसेना के राफेल-M लड़ाकू विमानों में किया जाएगा। आपसी सहमति से संयुक्त उद्यम देश के भीतर अन्य उपयोगकर्ताओं को मिसाइलें बेचने का निर्णय ले सकता है। द प्रिंट की एक रिपोर्ट के अनुसार, स्वदेशीकरण का स्तर धीरे-धीरे बढ़कर 60 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा, जिसमें प्रमुख उप-असेंबली, इलेक्ट्रॉनिक्स और यांत्रिक पुर्जे स्थानीय स्तर पर निर्मित किए जाएंगे। भारत के लिए यह 'मेक इन इंडिया' पहल को एक बड़ा प्रोत्साहन है।

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