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कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की पहली भारत यात्रा से क्या-क्या हैं उम्मीदें?
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की पहली भारत यात्रा से कई उम्मीदें की जा रही हैं

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की पहली भारत यात्रा से क्या-क्या हैं उम्मीदें?

Feb 27, 2026
04:26 pm

क्या है खबर?

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी 3 दिशों के हिंद-प्रशांत दौरे पर निकल रहे हैं, जिसमें भारत को कनाडा की विदेश आर्थिक नीति को पुनर्गठित करने और तनावपूर्ण राजनयिक संबंधों को सुधारने के प्रयासों के केंद्र में रखा गया है। वह 27 फरवरी से 2 मार्च भारत में रहेंगे और उसके बाद ऑस्ट्रेलिया और जापान भी जाएंगे। इस यात्रा का भारत वाला चरण विशेष रूप से कूटनीतिक महत्व रखता है। आइए जानते हैं कार्नी के भारत दौरे से क्या उम्मीदें रहेंगी।

कार्यक्रम

भारत दौरे पर कैसा रहेगा कार्नी का कार्यक्रम?

विदेश मंत्रालय के अनुसार, कार्नी 27 फरवरी को सीधे मुंबई पहुंचेंगे और अगले 2 दिनों में अलग-अलग व्यावसायिक कार्यक्रमों में भाग लेंगे। वे भारतीय और कनाडाई कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO), उद्योग और वित्तीय विशेषज्ञों, नवोन्मेषकों, शिक्षकों के साथ-साथ भारत में स्थित कनाडाई पेंशन फंडों के साथ बातचीत करेंगे। इसके बाद वह 1 मार्च को नई दिल्ली पहुंचेंगे और 2 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हैदराबाद हाउस में प्रतिनिधिमंडल स्तरीय वार्ता करेंगे।

जानकारी

कार्नी की पहली भारत यात्रा

प्रधानमंत्री बनने के बाद से कार्नी की भारत की यह पहली आधिकारिक द्विपक्षीय यात्रा है और यह दोनों देशों के बीच कई वर्षों से बाधित संबंधों के बाद हो रही है। यह यात्रा प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण के बाद हो रही है।

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वार्ता

भारत-कनाडा व्यापार वार्ता को गति मिलने की उम्मीद

व्यापार विविधीकरण कार्नी के विदेश नीति एजेंडे का प्रमुख विषय रहा है। उन्होंने अमेरिकी बाजार पर कनाडा की निर्भरता को कम करने के लिए भारत को प्रमुख साझेदार के रूप में देखा है। नवंबर 2025 में कार्नी और मोदी ने दक्षिण अफ्रीका में G-20 शिखर सम्मेलन में मुलाकात करते हुए आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) पर औपचारिक बातचीत शुरू करने पर सहमति जताई थी। ऐसे में अब मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।

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लक्ष्य

भारत और कनाडा ने रखा व्यापार को बढ़ाने का लक्ष्य

G-20 शिखर सम्मेलन में मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और कार्नी ने 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को 51 अरब डॉलर (करीब 4.59 लाख करोड़ रुपये) तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया था। दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार प्रवाह 2023 में लगभग 20.48 अरब डॉलर (करीब 1.84 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच गया था। हालांकि, उसके बाद जस्टिन ट्रूडो के नेतृत्व में दोनों देशों में तनाव बढ़ गया और व्यापार में गिरावट आ गई।

जानकारी

व्यापार में ये समझौते होने की है उम्मीद

व्यापार विशेषज्ञों के अनुसार, कार्नी के इस दौरे पर यूरेनियम, भारी कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों पर समझौते की उम्मीद है। इसी तरह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग और शिक्षा क्षेत्र में भी नए सहयोगी करार संभव हैं।

संबंध

द्विपक्षीय संबंधों की बहाली की उम्मीद

कनाडा ने हाल ही में कहा कि भारत अब उसके यहां होने वाले हिंसक अपराधों से संबंधित नहीं माना जाता, जिससे तनाव कम हुआ है और रिश्तों में सुधार की संभावनाएं बढ़ी हैं। दरअसल, कनाडा, भारत के साथ द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूत करना चाहता है। इसकी एक बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक और टैरिफ नीतियों को लेकर बढ़ती अनिश्चितता है, जिससे कनाडा पिछले कई महीनों से जूझ रहा है। ऐसे में यह दौरा काफी अहम रहेगा।

सहयोग

महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग भी संभव

दोनों प्रधानमंत्री हैदराबाद हाउस में 2 मार्च को उच्चस्तरीय वार्ता करेंगे, जिनमें ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स, कृषि, शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार प्रमुख विषय रहेंगे। क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर समन्वय पर भी जोर दिया जाएगा। रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि कनाडा भारत को यूरेनियम, द्रवीकृत प्राकृतिक गैस और द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस की आपूर्ति करने पर सहमत हो सकता है, जिससे द्विपक्षीय ऊर्जा संबंधों में एक नया अध्याय खुल सकता है। ये समझौते दोनों देशों के संबंधों को गति देंगे।

शिक्षा

शिक्षा संबंधी संबंधों में भी सुधार की उम्मीद

दोनों सरकारों ने AI और डिजिटल प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने में रुचि व्यक्त की है। भारत और कनाडा के विश्वविद्यालयों और अनुसंधान केंद्रों को जोड़ने वाली 200 से अधिक संस्थागत साझेदारियां हैं, जो अकादमिक आदान-प्रदान और सहयोगात्मक परियोजनाओं को सुगम बनाती हैं। कनाडा में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के सबसे बड़े स्रोतों में भारत प्रमुख है। वर्तमान में 3.19 लाख से अधिक भारतीय छात्र कनाडाई विश्वविद्यालयों में नामांकित हैं। ऐसे में यह सहयोग और मजबूत हो सकता है।

सुरक्षा

सुरक्षा के मुद्दे पर भी नए सिरे से शुरुआत की संभावना

जून 2023 में वैंकूवर के पास एक सिख कार्यकर्ता की हत्या में भारतीय अधिकारियों की संलिप्तता का आरोप के बाद दोनों देशों के संबंध तेजी से बिगड़े। इससे राजनयिक संबंधों में कमी आई और कांसुलर और व्यापारिक सेवाओं में व्यवधान उत्पन्न हुआ। हालांकि, कार्नी ने इस संबंधों को फिर से सुधारने के प्रयास किए हैं। अब कनाडा ने भारत की संलिप्तता से भी इनकार किया है। ऐसे में अब सुरक्षा के स्तर पर नई शुरुआत हो सकती है।

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