Loading...
क्या हैं 'अगली पीढ़ी के ग्रीन पटाखे', जिन्हें फोड़ने की सुप्रीम कोर्ट ने दी मंजूरी?
सुप्रीम कोर्ट ने अगली पीढ़ी के ग्रीन पटाखों को फोड़ने की अनुमति दी है (प्रतीकात्मक तस्वीर)

क्या हैं 'अगली पीढ़ी के ग्रीन पटाखे', जिन्हें फोड़ने की सुप्रीम कोर्ट ने दी मंजूरी?

लेखन आबिद खान
Oct 01, 2026
01:52 pm

क्या है खबर?

दिवाली आने से पहले पटाखों को लेकर चर्चाएं फिर तेज हो गई हैं। अब सुप्रीम कोर्ट ने अगली पीढ़ी के हरित पटाखों के निर्माण और बिक्री की मंजूरी दे दी है। यानी अब पारंपरिक लड़ी के जैसे पटाखे बनाए और बेचे जा सकेंगे। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर तरह की लड़ी को मंजूरी मिल गई है। कोर्ट ने कुछ शर्तें भी रखी हैं। आइए अगली पीढ़ी के ग्रीन पटाखों के बारे में जानते हैं।

फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने किस तरह के पटाखों के इस्तेमाल को दी मंजूरी?

सुप्रीम कोर्ट ने पहले लड़ी या ऐसे पटाखों पर प्रतिबंध लगा रखा था, जो एक श्रृंखला में जुड़े होते हैं और एक के बाद एक तेजी से फूटते हैं।

केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (CSIR-NEERI) द्वारा विकसित सूत्रों और मानकों का अनुपालन करने वाले लड़ी पटाखों को अनुमति दी जा सकती है।

इसके बाद कोर्ट ने ऐसे पटाखों के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है।

पटाखे

क्या होते हैं अगली पीढ़ी के ग्रीन पटाखे?

पुरानी लड़ियों में एक सेकंड के अंदर 25 अलग-अलग गूंथे हुए पटाखे फूट सकते थे। नई पीढ़ी के पटाखों में ये संख्या 25 से कम कर 5 कर दी गई है।

यानी इन लड़ियों में एक सेकंड में 25 की बजाय केवल 5 पटाखे ही फूटेंगे।

इसका मतलब है कि पटाखों के फूटने की रफ्तार कम होगी और एक साथ बड़ी संख्या में पटाखों से होने वाला प्रदूषण और धुंआ भी कम होगा।

ADVERTISEMENT

तैयार

कितने सुरक्षित हैं और कैसे तैयार होते हैं ये पटाखे?

CSIR-NEERI ने पारंपरिक पटाखों की तुलना में कण और गैसीय उत्सर्जन को कम करने के उद्देश्य से पर्यावरण-अनुकूल पटाखों के विशेष फॉर्मूले तैयार किए हैं।

संस्था ने पाया कि पटाखे के फॉर्मूलेशन और प्रकार के आधार पर उत्सर्जन में कमी आती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कम मात्रा में बेरियम साल्ट या नाइट्रेट और दूसरे ऑक्सीडाइजर वाले नए फॉर्मूलेशन से पारंपरिक पटाखों की तुलना में PM10 और PM2.5 के उत्सर्जन में 45 से 60 प्रतिशत तक कमी देखी गई है।

ADVERTISEMENT

शर्तें

किन शर्तों का करना होगा पालन?

नई पीढ़ी के इन ग्रीन पटाखों को तय फॉर्मूलेशन, उत्सर्जन, आवाज और सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा।

कोर्ट ने कहा कि इन पटाखों को तभी अनुमति दी जा सकती है, जब इन्हें लाइसेंस प्राप्त निर्माता ही बनाएं। उन्हें तय शोर सीमा और उत्सर्जन व सुरक्षा नियमों का पालन करना होगा।

पीठ ने केंद्र सरकार और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) को पटाखों के बेरियम की जांच, डेसिबल लेवल तय करने और फायर टेस्ट के लिए समय भी दिया है।

टिप्पणी

कोर्ट ने कहा- पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगा सकते

कोर्ट ने कहा, "हम न तो पूरी तरह प्रतिबंध लगाने जा रहे हैं और न ही उन्हें 24 घंटे तक ऐसा करने की इजाजत देंगे। पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने से लोगों की भावनाएं आहत होंगी और पूरे दिन अनुमति देने से बुजुर्गों, बीमारों और बच्चों पर बुरा असर पड़ेगा। हमें कोई ऐसा समाधान निकालना होगा जिससे हम एक तय समय दे सकें। CPCB रिपोर्ट के आधार पर तय किया जाएगा कि कौनसे पटाखे इस्तेमाल किए जा सकते हैं।"

ADVERTISEMENT