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मानसून पहले के अनुमान से और हुआ कमजोर, इस बार कम होगी बारिश
मानसून पहले के अनुमान से और हुआ कमजोर

मानसून पहले के अनुमान से और हुआ कमजोर, इस बार कम होगी बारिश

लेखन गजेंद्र
May 29, 2026
02:43 pm

क्या है खबर?

भीषण गर्मी के बीच अल नीनो के प्रभाव को देखते हुए मानसून पर होने वाली बारिश का अनुमान और घट गया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अप्रैल में अपने पहले के दीर्घकालिक औसत (LPA) पूर्वानुमान को 92 प्रतिशत बताया था, जो शुक्रवार को जारी नए अनुमान में घटाकर 90 प्रतिशत कर दिया है। यानी पहले मानसून में सामान्य से 92 प्रतिशत से कम बारिश की संभावना थी, जो अब और घटकर 90 प्रतिशत हो गई है।

बारिश

मानसून में कमी की संभावना 60 प्रतिशत सटीक

IMD ने बताया कि उसने जो मानसून की बारिश में 90 प्रतिशत कमी का अनुमान जताया है, उसके सटीक होने की संभावना 60 प्रतिशत है। वहीं, इससे पहले मानसून की बारिश में 92 प्रतिशत कमी का अनुमान जताया था, उसके सटीक होने की संभावना 24 प्रतिशत है। इससे साबित होता है कि मानसून की बारिश सामान्य से 90 प्रतिशत कम होने का अनुमान सफल होने का अनुमान अधिक है। हालांकि, अनुमान में 4 प्रतिशत का घटाव-बढ़ाव भी हो सकता है।

मानसून

पूर्वोत्तर भारत में अधिक बारिश, जून में भीषण गर्मी

IMD के मुताबिक, पूर्वोत्तर भारत में बारिश सामान्य से 94 से 106 प्रतिशत रहने की संभावना है, जबकि मध्य और दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में यह 94 प्रतिशथ से कम होने की संभावना है। दिल्ली समेत उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश 92 प्रतिशत से कम रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने बताया कि जून से सितंबर के बीच उत्तर-पश्चिम भारत के हिस्सों में गर्मी देखने को मिलेगी और कमजोर अल नीनो की स्थिति जून की शुरुआत में ही बन जाएगी।

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मानसून

केरलम में दिखने लगा अल नीनो का असर?

केरलम में मानसून आमतौर पर 1 जून के आसपास पहुंचता है। इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून 4 दिन आगे-पीछे होने के साथ 26 मई को पहुंचने की संभावना थी। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम रविचंद्रन ने बताया कि फिलहाल अधिकांश वर्षा समुद्र में हो रही है, मुख्य भूमि पर नहीं। इसलिए अभी तक केरल में मानसून के आगमन की घोषणा नहीं की गई है। उम्मीद है कि अगले एक सप्ताह में मानसून धीरे-धीरे प्रायद्वीपीय भारत के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में बढ़ेगा।

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अल नीनो

क्या है अल नीनो?

अल नीनो एक तरह की मौसमी घटना है, जिसकी वजह से मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्री सतह का पानी सामान्य से 4 से 5 डिग्री सेल्सियस अधिक गर्म हो जाता है। इसके चलते पूर्व से पश्चिम की ओर बहने वाली हवाएं कमजोर पड़ती हैं और गर्म पानी पूर्व यानी अमेरिका के पश्चिमी तट की ओर जाने लगता है। साल 1600 में पहली बार इस प्रभाव को देखा गया था।

ट्विटर पोस्ट

मौसम विभाग का पोस्ट

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