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वंदे मातरम को लेकर नए दिशानिर्देश जारी, अब राष्ट्रगान से पहले बजेगा और खड़े होना जरूरी
गृह मंत्रालय ने वंदे मातरम गीत को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए

वंदे मातरम को लेकर नए दिशानिर्देश जारी, अब राष्ट्रगान से पहले बजेगा और खड़े होना जरूरी

लेखन गजेंद्र
Feb 11, 2026
09:40 am

क्या है खबर?

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए है, जिसमें इसके गायन को हर कार्यक्रम में अनिवार्य किया गया है। मंत्रालय ने दिशानिर्देश में बताया है कि 'वंदे मातरम' को कब, कहां, कैसे और कितना गाया जाना है। इसे सभी सरकारी कार्यक्रमों और स्कूलों में राष्ट्रगान 'जन गण मन' पहले गाया जाएगा। मंत्रालय ने कहा है कि वंदे मातरम गाते समय सावधान की मुद्रा में खड़े होना अनिवार्य है।

वंदे मातरम

3 मिनट 10 सेकेंड के 6 छंद गाए और बजाए जाएंगे

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, तिरंगा फहराने, राष्ट्रपति कार्यक्रम, आगमन, राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले-बाद में, राज्यपालों के आगमन, भाषणों से पहले-बाद में, स्कूल-सभा समेत अन्य आधिकारिक अवसरों पर वंदे मातरम के 6 छंदों के 3 मिनट 10 सेकंड का संस्करण बजाया या गाया जाए। यह 10 पन्नों का दिशानिर्देश 28 जनवरी को जारी हुआ है, जिसमें मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रगान-राष्ट्रगीत साथ बजाया जाता है, तो वंदे मातरम पहले बजाया जाएगा और श्रोता सावधान की मुद्रा में खड़े होंगे।

निर्देश

सिनेमा में नहीं खड़ा होना होगा

दिशानिर्देश में बताया गया कि जब भी राष्ट्रीय गीत का आधिकारिक संस्करण गाया या बजाया जाए, तो श्रोताओं को सावधान मुद्रा में खड़ा होना चाहिए। मंत्रालय ने राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, मंत्रालयों और संवैधानिक निकायों को अंग्रेजी और हिंदी में जारी किए नोट में बताया कि किसी समाचार रील या वृत्तचित्र के दौरान राष्ट्रगीत को फिल्म के एक भाग के रूप में बजाए जाने पर श्रोता खड़े न हों, क्योंकि इससे फिल्म का प्रदर्शन बाधित होगा और अव्यवस्था पैदा होगी।

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नियम

अभी तक नहीं था कोई नियम

अभी तक राष्ट्रगान के लिए तो नियम था, लेकिन राष्ट्रगीत वंदे मातरम के गायन के लिए कोई आधिकारिक प्रोटोकॉल नहीं था, जबकि जन गण मन के लिए धुन, अवधि और गायन के संबंध में स्पष्ट नियम निर्धारित हैं। यह कदम केंद्र सरकार द्वारा वंदे मातरम को लोकप्रिय बनाने के हालिया प्रयासों का हिस्सा है। इससे पहले राष्ट्रीय गीत की 150वीं वर्षगांठ पर संसद में तीखी बहस हुई थी और गणतंत्र दिवस परेड के दौरान कई झांकियों का प्रदर्शन हुआ था।

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श्रेणी

तीन श्रेणी में आयोजन को किया गया परिभाषित

मंत्रालय के आदेश में आयोजनों को 3 श्रेणियों में बांटा गया है, जिसमें राष्ट्रगीत बजाया जाना है। पहली श्रेणी में राष्ट्रीय आयोजन, दूसरी श्रेणी में सामूहिक आयोजन या सांस्कृति समारोह और तीसरी श्रेणी में विद्यालय कार्यक्रम शामिल है। आदेश में कहा गया है कि राष्ट्रगीत बजने से पहले ढोल बजाए जाएंगे ताकि श्रोताओं को पता चल जाए कि राष्ट्रगीत बजने वाला है, जैसे कि राष्ट्रगान से पहले तुरही बजाई जाती है।

जानकारी

1870 के दशक में लिखा गया था गीत

बंगाली साहित्य के दिग्गज बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1870 के दशक में संस्कृतनिष्ठ बंगाली में वंदे मातरम लिखा था। इसे सर्वप्रथम स्वतंत्रता आंदोलन द्वारा मातृभूमि की प्रशंसा के लिए अपनाया गया। 1950 में, इसके पहले 2 छंद भारतीय राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाए गए।

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