उत्तराखंड प्रशासन और निहंग सिखों का विवाद समाप्त, यातायात बहाल
क्या है खबर?
उत्तराखंड में पिछले कई दिनों से जारी निहंग सिखों का गतिरोध गुरुवार देर रात समाप्त हो गया। दरअसल, कर्णप्रयाग में स्थानीय और निहंग के बीच हुए संघर्ष और नागरासु गुरुद्वारा मुद्दे को लेकर पंजाब और हिमाचल प्रदेश से निहंग सिख उत्तराखंड में प्रवेश करना चाह रहे थे। राज्य सरकार ने उत्तराखंड-हिमाचल प्रदेश सीमा पर उन्हें रोक दिया, जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई और यातायात प्रभावित हुआ। फिलहाल, बातचीत के बाद देहरादून और आसपास के इलाकों में स्थिति सामान्य है।
बातचीत
उत्तराखंड-हिमाचल सीमा पर जमे थे निहंग
हिमाचल प्रदेश और पंजाब से निहंग सिख कुलहाल चेक पोस्ट के पास एकत्रित हुए थे। पहला जत्था हिमाचल प्रदेश के गुरुद्वारा पांवटा साहिब में दिन बिताने के बाद सीमा पर पहुंचा था। उत्तराखंड के प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें मार्च स्थगित करने के लिए मनाया। बाद में सीमा पर हाई अलर्ट जारी कर भारी पुलिस बल और बैरीकेड लगा दिए। इस दौरान देहरादून, ऋषिकेश और मसूरी जाने वाली सड़कें बंद थी और लोग परेशान होकर हिमाचल प्रदेश लौट रहे थे।
बातचीत
बातचीत रही सफल, वापस लौटे निहंग
कांग्रेस नेता और उत्तराखंड सिख समुदाय के प्रतिनिधि अमरजीत सिंह ने कहा कि निहंगों का उद्देश्य कभी अशांति पैदा करना नहीं था, बल्कि मुद्दे को शांति से हल करना था। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने स्थिति को पहाड़ी समुदायों और सिखों के बीच संघर्ष के रूप में नहीं देखे जाने पर जोर दिया है। सभी निहंगों ने अधिकारियों को आश्वासन दिया कि वे वापस लौटेंगे। इसके बाद स्थिति सामान्य हुई। हालांकि, पुलिस स्थिति पर नजर बनाए है।
तनाव
उत्तराखंड क्यों कूच कर रहे थे निहंग सिख?
पिछले दिनों उत्तराखंड में 2 ऐसी घटनाएं घटी, जिसने निहंग सिखों को नाराज कर दिया। पहली घटना 16 जून को चमोली के कर्णप्रयाग में हुई, जहां पार्किंग को लेकर निहंग तीर्थयात्रियों और स्थानीयों के बीच मारपीट हो गई। पुलिस ने 4 निहंग को गिरफ्तार किया, जिसका विरोध शुरू हो गया। इसके बाद 20 जून को रुद्रप्रयाग के नागरासु गुरुद्वारा में 6-7 निहंग गुरुद्वारे की छत पर चढ़ गए और उत्पात मचाया। वे 4 दिन बाद बातचीत के बाद नीचे उतरे।