पीलीभीत में 13,000 मतदाताओं के नामों में गड़बड़ी, चुनाव आयोग की कार्रवाई; क्या है मामला?
क्या है खबर?
SIR को लेकर चल रहे विवाद के बीच चुनाव आयोग के लिए परेशानी खड़ी करने वाला एक और मामला सामने आया है। उत्तर प्रदेश की पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में 13,150 मतदाताओं के नामों में गड़बड़ी सामने आई है। आरोप है कि मतदाता का EPIC नंबर, उम्र और लिंग वही है, लेकिन नाम और पिता का नाम बदल गया है। चुनाव आयोग ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। आइए पूरा मामला समझते हैं।
मामला
क्या है मामला?
इस विवाद की शुरुआत 13 अक्टूबर को हुई थी। तब कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में 16,554 मतदाताओं के नाम और जानकारी में गड़बड़ पाई गई।
कांग्रेस का कहना है कि 13 अक्टूबर को एक व्यक्ति साइबर कैफे में अपना EPIC नंबर बताकर मतदाता पहचान पत्र निकलवाने पहुंचा था।
इसमें उसका नाम और पिता का नाम बदला हुआ था। जबकि, 10 अप्रैल को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में उसकी जानकारी सही थी।
प्रकार
किस-किस तरह की गड़बड़ी सामने आई?
मतदाता सूची में 16,554 मतदाताओं से जुड़ी 3 तरह की गड़बड़ियां सामने आई हैं।
पहली गड़बड़ी 13,150 मतदाताओं से जुड़ी हैं, जिनका EPIC नंबर और मतदाता सूची में क्रम संख्या सही है, लेकिन नाम और पिता का नाम बदल गया। इनमें ज्यादातर मुस्लिम मतदाता हैं।
दूसरा आरोप है कि 804 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। तीसरी श्रेणी में आरोप है कि करीब 2,600 नए नाम मतदाता सूची में जोड़े गए हैं।
जांच
कांग्रेस का दावा- रिकॉर्ड में बदलाव के तकनीकी सबूत मिले
स्थानीय कांग्रेस नेता कुमुद गंगवार ने बताया कि शुरुआती गड़बड़ी सामने आने के बाद कांग्रेस ने 55 लोगों की टीम बनाई, जिसने लगातार 96 घंटे तक जांच की।
इस दौरान विधानसभा के सभी 419 बूथों के 3,48,937 मतदाताओं के रिकॉर्ड का सत्यापन किया गया।
गंगवार ने दावा किया कि कुछ ऑनलाइन रिकॉर्ड में 2 सितंबर को रात 9:26 बजे संदिग्ध बदलाव के तकनीकी सबूत मिले हैं। हालांकि, अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
कार्रवाई
चुनाव आयोग ने क्या कार्रवाई की है?
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत ERO और VRC के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का निर्देश दिया है।
वहीं, जिलाधिकारी ने 2 SDM को हटाकर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है।
CEO रिणवा ने कहा कि जहां से भी मतदाता सूची में गडबड़ी की शिकायत मिलेगी वहां पर जांच कराई जाएगी।
समाजवादी पार्टी
समाजवादी पार्टी ने भी सरकार को घेरा
इस मामले पर समाजवादी पार्टी ने भी भाजपा सरकार और प्रशासन पर निशाना साधा।
पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा ने आरोप लगाया कि आगामी चुनाव में हार के डर से गन्ना राज्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ साजिश रची है।
उन्होंने दावा किया कि 13-14 हजार अल्पसंख्यक और विपक्षी समर्थकों के नाम-पते बदले गए, ताकि वे वोट न दे पाएं।
उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जीवाड़े का केंद्र मंत्री के आवास में है, जहां कंप्यूटर विशेषज्ञों ने हेराफेरी की है।