रूसी तेल खरीद पर अमेरिका ने छूट खत्म की, भारत पर क्या होगा असर?
क्या है खबर?
अमेरिका ने एक और बड़ा फैसला लेते हुए कहा है कि वह रूस और ईरान से तेल खरीद पर दी गई प्रतिबंध छूट को आगे नहीं बढ़ाएगा। व्हाइट हाउस में वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि रूस और ईरान से तेल खरीदने के लिए दी गई अस्थायी छूट को अब आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। इस फैसले का असर भारत समेत उन देशों पर पड़ सकता है, जिन्होंने छूट का फायदा उठाकर तेल खरीदना जारी रखा था।
फैसला
छूट खत्म करने को लेकर अमेरिका ने क्या कहा?
बेसेंट ने कहा, "हम रूसी तेल पर दी गई आम छूट को और आगे नहीं बढ़ाएंगे। 11 मार्च से पहले तक समुद्र में फंसा रूस का सारा तेल इस्तेमाल हो चुका है।" उन्होंने बताया कि रूसी तेल पर छूट 11 अप्रैल को खत्म हो गई, जबकि ईरानी तेल के लिए दी गई छूट 19 अप्रैल को खत्म हो जाएगी। बेसेंट ने चेतावनी दी कि जो देश अब भी रूसी या ईरानी तेल खरीदेंगे, उन पर 'सेकेंडरी प्रतिबंध' लगाए जाएंगे।
छूट
अमेरिका ने क्यों दी थी छूट?
दरअसल, ईरान युद्ध के चलते दुनियाभर में तेल संकट पैदा हो गया था। इसके चलते अमेरिका ने अल्पकालिक उपाय के तौर पर देशों को रूसी और ईरानी तेल खरीदने की छूट दी थी। इसके तहत, 12 मार्च से पहले जहाजों में लादे गए रूसी कच्चे तेल के लिए 30 दिनों की छूट मिली थी। इसी तरह 20 मार्च से पहले जहाजों पर लादे गए ईरानी तेल के लिए भी एक महीने की छूट मिली थी।
भारत
छूट से भारत को क्या फायदा हुआ था?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय रिफाइनरियों ने छूट की अवधि के दौरान करीब 3 करोड़ बैरल रूसी तेल के ऑर्डर दिए। छूट के दौरान 7 साल बाद पहली बार ईरानी कच्चे तेल के जहाज भारत पहुंचे। 'जया' और 'फेलिसिटी' नामक 2 जहाजों ने ईरानी तेल को भारत पहुंचाया। यूरोपीय थिंक टैंक सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर ने एक रिपोर्ट में कहा कि मार्च 2026 में भारत रूसी ईंधन का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार था।
असर
छूट खत्म होने का क्या होगा असर?
इन छूटों से भारत की तेल आपूर्ति को अस्थायी ही सही, लेकिन जरूरी राहत मिली थी। मार्च में भारत ने रूस से 57,000 करोड़ रुपये का कच्चा तेल खरीदा था। फरवरी में ये आंकड़ा केवल 14,000 करोड़ रुपये था। साथ ही मार्च में भारत का कुल कच्चे तेल का आयात 4 प्रतिशत गिर गया, लेकिन रूस से होने वाला आयात 4 गुना बढ़ गया। अब जब ये छूट खत्म हो रही है, तो देश को रणनीति में बदलाव करना होगा।