तुर्की को F-35 लड़ाकू विमान देने की तैयारी में अमेरिका, भारत क्यों चिंतित?
क्या है खबर?
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने NATO शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए तुर्की का दौरा किया था। इस दौरान ट्रंप ने कहा कि वे तुर्की पर काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शंस एक्ट (CAATSA) के तहत लगे प्रतिबंध हटाने पर विचार कर रहे हैं। अगर ऐसा हुआ तो तुर्की को अमेरिका के F-35 लड़ाकू विमान मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। आइए समझते हैं कि भारत की इस घटनाक्रम पर क्यों नजरें हैं।
प्रतिबंध
सबसे पहले प्रतिबंध हटाने का मामला समझिए
दरअसल, तुर्की ने 2019 में रूस से S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीदी थी। इससे नाराज होकर अमेरिका ने 2020 में उस पर प्रतिबंध लगा दिए थे। अमेरिका ने इसी प्रतिबंध के तहत तुर्की से F-35 लड़ाकू विमान का सौदा रद्द कर दिया था। अब ट्रंप ने कहा कि अमेरिका यह प्रतिबंध हटा देगा। ट्रंप ने कहा, "हम अपने दोस्तों पर प्रतिबंध नहीं लगाना चाहते। ऐसे बहुत से लोग हैं, जिन पर हम प्रतिबंध लगा सकते हैं, लेकिन दोस्तों पर नहीं।"
विमान
विमान के उत्पादन और विकास में अहम भागीदार था तुर्की
तुर्की अमेरिका से केवल F-35 विमान खरीद नहीं रहा था। वो इस 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के विकास में शामिल अंतरराष्ट्रीय उत्पादन भागीदारों में से एक था। तुर्की की कंपनियों को विमान की वैश्विक विनिर्माण आपूर्ति श्रृंखला में शामिल किया गया था। तुर्की अपनी वायुसेना में करीब 100 विमान शामिल करना चाहता था। इस बीच तुर्की ने रूस से S-400 सिस्टम खरीद लिया। अमेरिका का कहना था कि इसका इस्तेमाल रूस विमान की जानकारी जुटाने में कर सकता है।
भारत
भारत के लिए क्या है चिंता की बात?
भारत खुद रूसी S-400 सिस्टम का इस्तेमाल करता है। जब भारत ने इसे रूस से खरीदना चाहा, तो CAATSA प्रतिबंधों के संभावित इस्तेमाल को लेकर सवाल उठे। हालांकि, जो बाइडन के प्रशासन में भारत को अमेरिकी कांग्रेस से S-400 खरीदने की छूट मिली। तुर्की पर प्रतिबंध हटना एक संकेत है कि कैसे अमेरिका इन नियमों का इस्तेमाल अपनी सुविधानुसार करता है। यह संदेश है कि जब व्यापक कारण सामने आते हैं तो अमेरिकी प्रतिबंध नीति में बदलाव हो जाते हैं।
पाकिस्तान
तुर्की-पाकिस्तान की नजदीकी भी है वजह
हालिया सालों में तुर्की पाकिस्तान का सबसे अहम रक्षा साझेदार बन गया है। तुर्की पाकिस्तान के साथ मिलगेम युद्धपोत कार्यक्रम और अत्याधुनिक रक्षा उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों की आपूर्ति कर रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ तुर्की में बने ड्रोनों का इस्तेमाल किया था। अगर तुर्की 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान इस्तेमाल करता है, तो संभव है कि वो इसका अनुभव या तकनीकी जानकारी पाकिस्तान के साथ साझा करे।
पश्चिम एशिया
भारत की चिंता की ये भी है वजह
भारत ने इजरायल, अमेरिका और UAE वाले I2U2 और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) के माध्यम से पश्चिम एशिया की आर्थिक और सुरक्षा संरचना में व्यापक निवेश किया है। तुर्की पर प्रतिबंध हटने को लेकर इजरायल ने भी चिंता जाहिर की है। इस वजह से अगर आगे चलकर अमेरिका और इजरायल में मतभेद बढ़ते हैं, तो पश्चिम एशिया के हालात बिगड़ सकते हैं। ये भारत की व्यापार सुरक्षा, ऊर्जा पारगमन गलियारों और दीर्घकालिक कनेक्टिविटी परियोजनाओं के अच्छी स्थिति नहीं होगी।