अमेरिकी नागरिक और 6 यूक्रेनियों को NIA कोर्ट से राहत, 1 महीने के लिए लौटेंगे स्वदेश
क्या है खबर?
दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कोर्ट ने म्यांमार आतंकी प्रशिक्षक कैंप और आतंकी साजिश के मामले में गिरफ्तार अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वानडाइक और 6 यूक्रेनी नागरिकों को बहुत बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने सभी परिवार से मिलने के लिए एक महीने की सशर्त जमानत दी है। इसके बाद शुक्रवार को उन्हें तिहाड़ जेल से भी रिहा कर दिया गया है। इस 30 दिन की अवधि के बाद सभी वापस भारत लौटना होगा।
आदेश
कोर्ट ने क्या दिया आदेश?
विशेष NIA कोर्ट न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने आरोपियों द्वारा दायर विदेश यात्रा की अर्जियों को स्वीकार करते हुए उनके जब्त पासपोर्ट को तुरंत जारी करने का आदेश दिया।
कोर्ट ने कहा, "विदेश जाने का अधिकार भारतीय संविधान के तहत नागरिकों को मिले मौलिक अधिकार का ही एक विस्तार है।"
UAPA के कड़े आरोपों में तकनीकी राहत मिलने के बाद गुरुवार रात को कानूनी कागजी कार्रवाई पूरी की गई और फिर उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया।
शर्त
कोर्ट ने स्वदेश लौटने के लिए क्या-क्या रखी शर्त?
कोर्ट ने आदेश दिया कि उनकी एक महीने की अवधि फ्लाइट में सवार होने के दिन से शुरू होगी। अवधि खत्म होने के बाद सभी को भारत लौटना होगा।
उन्हें 24 घंटे के भीतर अपना पता, मोबाइल नंबर और ईमेल जैसी जानकारी NIA को देनी होगी।
कोर्ट ने सभी आरोपियों को निर्देश दिया कि NIA जब भी जांच में शामिल होने के लिए कहे, उन्हें वीडियो कॉल या व्यक्तिगत रूप से जांच में शामिल होना होगा।
कारण
चार्जशीट से क्यों हटाई गई UAPA की धाराएं?
शुरुआत में NIA ने इन सभी के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) की धारा 18 - आतंकी साजिश) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज की थी।
इन पर म्यांमार के विद्रोही गुटों को ड्रोन और हथियारों का प्रशिक्षण देने का आरोप था। NIA ने मामले में गहन जांच की।
हालांकि, इस महीने दाखिल की गई पहली आधिकारिक चार्जशीट में सबूतों की कमी के कारण आतंकी आरोपों (UAPA) को शामिल नहीं किया।
धारा
चार्जशीट में आरोपियों के खिलाफ लगाई गई हैं सामान्य धाराएं
NIA ने चार्जशीट में केवल आव्रजन एवं विदेशी अधिनियम की धारा 21 और 23 के तहत आरोप लगाए हैं, जो भारत में विदेशी नागरिकों के अवैध प्रवेश, आवाजाही और रुकने के नियमों के उल्लंघन से संबंधित हैं।
NIA ने स्पष्ट किया कि आतंकी साजिश को लेकर एजेंसी की जांच अभी पूरी तरह बंद नहीं हुई है। यदि भविष्य में पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो पूरक चार्जशीट के जरिए UAPA की धाराएं दोबारा जोड़ी जा सकती हैं।
पृष्ठभूमि
क्या है आतंकी प्रशिक्षण का पूरा मामला?
इन सातों विदेशी नागरिकों को NIA ने इसी साल मार्च में कोलकाता, दिल्ली और लखनऊ के हवाई अड्डों से संदिग्ध परिस्थितियों में गिरफ्तार किया था।
आरोप था कि ये सभी पर्यटक वीजा पर भारत आए और बिना जरूरी अनुमति के पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम के प्रतिबंधित सीमावर्ती इलाकों में पहुंच गए।
इन्होंने अवैध रूप से सीमा पार कर म्यांमार की पहाड़ियों में प्रवेश किया, जहां इन्होंने भारत-विरोधी विद्रोही गुटों को ड्रोन संचालित करने और सैन्य युद्ध का प्रशिक्षण दिया था।