UPSC के 100 साल: 45 लाख सपनों का सफर और शीर्ष पदों पर महिला शक्ति का डंका
आज UPSC ने अपने 100 साल पूरे कर लिए हैं। इस दौरान इसने भारत के बड़े सिविल सेवकों को चुनने का काम किया है। इसके आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि 1950-51 में जहां इसे 42,727 आवेदन मिले थे, वहीं 2022-23 में यह संख्या बढ़कर 45,10,044 हो गई।
साल 2022-23 में UPSC ने 15 परीक्षाएं आयोजित कीं, जिनके लिए 33,51,916 आवेदन प्राप्त हुए। इसके अलावा, चयन प्रक्रिया से 4,411 पदों पर भर्ती के लिए 233 मांग पत्र भी मिले, जो यह दिखाता है कि इसकी पहुंच कितनी बढ़ी है।
चयन में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग एक-तिहाई
विविधता के प्रति यूपीएससी का प्रयास साफ झलकता है। 1952 में सफल उम्मीदवारों में सिर्फ तीन महिलाएं थीं, लेकिन 2025 तक कुल चयन में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग एक-तिहाई हो गई है। खास बात ये है कि शीर्ष पदों में लगभग आधे पर महिलाओं ने जगह बनाई है।
परीक्षा केंद्रों की संख्या भी काफी बढ़ाई गई है, ताकि पूरे देश के लोग आसानी से इसमें हिस्सा ले सकें। यहां तक कि केंद्र सरकार ने भी कहा है कि, "पिछले सौ सालों से आयोग ने देश की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में से एक को संभाला है: योग्यता को पहचानना, निष्पक्षता बनाए रखना और यह सुनिश्चित करना कि अवसर किसी विशेषाधिकार, भौगोलिक स्थिति, भाषा या परिस्थिति से परे हर किसी तक पहुंचे।"