UN की रिपोर्ट: 2050 तक 80 प्रतिशत मुंबई के जलमग्न होने का खतरा
संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट में मुंबई को दक्षिण एशिया के उन शहरों में शामिल किया गया है, जिन पर समुद्र के बढ़ते जलस्तर का सबसे ज्यादा खतरा है। इस रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे क्षेत्र में 1 करोड़ 40 लाख से ज्यादा लोगों को अपना घर छोड़कर कहीं और जाना पड़ सकता है।
मुंबई, कोलकाता और ढाका जैसे निचले इलाके वाले शहर सबसे ज्यादा खतरे में हैं, और यहां के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
जमीन धंसने और खारे पानी की घुसपैठ से मुंबई को खतरा
मुंबई पर मंडराता खतरा सिर्फ समुद्र का जलस्तर बढ़ने तक ही सीमित नहीं है। जमीन का धंसना और खारे पानी का मीठे पानी के स्रोतों में मिल जाना भी हालात को और खराब कर रहा है।
शहर के अपने क्लाइमेट एक्शन प्लान ने भी चेतावनी दी थी कि साल 2050 तक मुंबई का 80 प्रतिशत द्वीपीय शहर पानी में डूब सकता है। नरिमन पॉइंट, बांद्रा, धारावी और वर्सोवा जैसे इलाके बाढ़ और जलभराव के सबसे ज्यादा खतरे में हैं। संयुक्त राष्ट्र ने इस गंभीर स्थिति पर तुरंत कार्रवाई करने की अपील की है।