सुप्रीम कोर्ट से जमानत रद्द होने पर उमर खालिद बोले- अब यही जिंदगी है
क्या है खबर?
दिल्ली दंगे के आरोपी उमर खालिद की सुप्रीम कोर्ट से जमानत इंकार होने पर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के पूर्व छात्र काफी निराश हैं। उन्होंने कहा कि अब जेल ही उनका जीवन बन गया है। खालिद की साथी बनोज्योत्सना लाहिड़ी ने एक्स पर उनके साथ हुई एक संक्षिप्त व्यक्तिगत बातचीत साझा की। उन्होंने पोस्ट में खालिद के हवाले से लिखा, "जिन अन्य लोगों को जमानत मिल गई है, उनके लिए मैं बहुत खुश हूं, मुझे बहुत राहत मिली है।"
निराश
जेल की जिंदगी को स्वीकार किया?
लाहिड़ी ने आगे लिखा कि उन्होंने अगले दिन उनसे मुलाकात के लिए कहा है, जिस पर खालिद ने जवाब दिया, "अच्छा, अच्छा, आ जाना। अब यही जिंदगी है।" इससे यह संकेत मिलता है कि उन्होंने अपनी निरंतर कैद को स्वीकार कर लिया है। बता दें कि खालिद पिछले कई सालों से जमानत के लिए प्रयास कर रहे हैं। उनको सुप्रीम कोर्ट के फैसले से धक्का लगा है। अब वे एक साल बाद जमानत के लिए याचिका दायर कर सकेंगे।
फैसला
कोर्ट ने क्यों नहीं दी जमानत?
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और एनवी अंजारी की पीठ ने खालिद-इमाम की याचिका खारिज कर दी, जबकि गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर-रहमान, सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दे दी। पीठ ने कहा कि इमाम-खालिद अन्य आरोपियों से गुणात्मक रूप से भिन्न स्थिति में हैं, और उनके मामले में UAPA की धारा 43डी(5) के तहत वैधानिक सीमा लागू होती है। कोर्ट ने कहा कि UAPA के तहत सुनवाई में देरी को 'ट्रंप कार्ड' की तरह इस्तेमाल नहीं कर सकते।