बड़े शहरों में बच्चे पालने की लागत 6.75 करोड़ रुपये तक पहुंची, परिजनों की बढ़ी परेशानी
खुद को वित्तीय सलाहकार बताने वाले उदयन आध्ये ने हाल ही में कहा है कि भारत के बड़े शहरों में बच्चे पालने का खर्च 6.75 करोड़ रुपये तक जा सकता है। उन्होंने बताया कि इसकी मुख्य वजह शिक्षा के बढ़ते हुए खर्चे हैं। ये खर्चे हर साल 10 से 12 प्रतिशत की दर से बढ़ रहे हैं, जिसका सीधा मतलब है कि हर 6 साल में इनकी लागत लगभग दोगुनी हो जाती है। उन्होंने आगाह किया है कि अगर आपके निवेश पर सिर्फ 5 से 6 प्रतिशत का रिटर्न मिल रहा है, तो वह इन तेजी से बढ़ते खर्चों की बराबरी नहीं कर पाएगा।
माता-पिता को ट्यूशन के अलावा झेलने पड़ रहे हैं ये खर्च
आध्ये ने बताया कि बच्चे पालने का असली खर्च सिर्फ ट्यूशन फीस तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इससे कहीं ज्यादा है। ट्यूशन फीस तो वैसे भी हर साल 2 से 10 लाख रुपये तक होती ही है। इसके अलावा, माता-पिता को 21 सालों तक बच्चों के खेलकूद, संगीत की क्लास, कोचिंग, गैजेट्स, घूमने-फिरने, इलाज और उनकी जीवनशैली से जुड़ी जरूरतों पर भी बड़ा पैसा खर्च करना पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि आमतौर पर मास्टर या Phd जैसी उच्च शिक्षा का खर्च बच्चे खुद लोन लेकर या फिर अपनी कमाई से उठाते हैं। इसलिए, समय से पहले सही तरीके से योजना बनाना बेहद जरूरी है।