महाराष्ट्र में उबर, ओला, रैपिडो को लाइसेंस संकट, अब क्या होगा?
महाराष्ट्र सरकार की नई एग्रीगेटर नीति के तहत उबर, ओला और रैपिडो अभी तक जरुरी लाइसेंस हासिल नहीं कर पाए हैं। इसके चलते ये कंपनियां 1 सितंबर की समय सीमा से चूक गई हैं।
अगस्त 2026 में लागू हुए इस नियम के मुताबिक, सभी राइड-हेलिंग ऐप को एक यूनिक लाइसेंस आइडेंटिफिकेशन नंबर (ULIN) लेना होगा और 3 साल के लिए वैध लाइसेंस हासिल करना होगा।
राज्य परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने इन कंपनियों पर ढिलाई बरतने का आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्हें नियमों का पालन करने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था।
उबर, ओला और रैपिडो के साथ बैठक निर्धारित
उबर, ओला और रैपिडो के प्रतिनिधियों के साथ 4 सितंबर को एक बैठक होनी है। इस बैठक में आगे क्या कदम उठाए जाएं, इस पर फैसला लिया जाएगा। फिलहाल, इन कंपनियों की सेवाएं बंद नहीं की गई हैं।
हालांकि, मंत्री सरनाइक ने फिर दोहराया कि इन कंपनियों को नियमों का पालन करने के लिए पूरा समय दिया गया था। अब विभाग ही तय करेगा कि इन पर क्या कार्रवाई की जाए। इस नई नीति के तहत, अब बेस किराए सरकारी अधिकारियों द्वारा तय किए जाएंगे। इसमें 25 प्रतिशत तक की छूट दी जा सकेगी, जबकि पीक आवर्स में सर्ज प्राइसिंग अधिकतम 1.5 गुना तक होगी। साथ ही, ड्राइवरों को कुल किराए का कम से कम 80 प्रतिशत हिस्सा मिलना चाहिए और उन्हें काम के घंटों की सीमा का भी पालन करना होगा। पुणे में, उबर और रैपिडो को अभी भी ई-बाइक टैक्सी की मंजूरी का इंतजार है।