बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर सख्त हुआ सुप्रीम कोर्ट, केंद्र से मांगी देशव्यापी कार्य योजना
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) से पूछा है कि ऑनलाइन बच्चों की सुरक्षा के लिए आखिर क्या कदम उठाए जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह सवाल एक स्कूल की याचिका पर उठाया है। इस याचिका में मांग की गई थी कि बच्चों की उम्र की जांच हो, माता-पिता की सहमति ली जाए और उन्हें साइबर बुलिंग व हानिकारक ऑनलाइन कंटेंट से बेहतर तरीके से बचाया जाए। इस मामले पर अगली सुनवाई 7 दिसंबर को होगी।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका
याचिका में कहा गया है कि सरकार बच्चों को ऑनलाइन खतरों जैसे ग्रूमिंग (फंसाने की कोशिश), शोषण और साइबर बुलिंग (धमकाना) से बचाने के लिए अब तक पर्याप्त कदम नहीं उठा पाई है। याचिका में यह भी ध्यान दिलाया गया है कि स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताने से बच्चों में चिंता, नींद की समस्याएं और पढ़ाई में अरुचि जैसी दिक्कतें तेजी से बढ़ी हैं। इस याचिका का मकसद है कि पूरे देश में एक ऐसी योजना बनाई जाए, जिससे बच्चे सोशल मीडिया का इस्तेमाल और भी सुरक्षित तरीके से कर सकें।