सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल विस्टा लाइब्रेरी योजना पर केंद्र सरकार से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से 3 हफ्तों के भीतर जवाब तलब किया है। कोर्ट जानना चाहता है कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत बन रही नई लाइब्रेरी को कैसे संभाला जाएगा। खास तौर पर, उन करीब 2 लाख किताबों का क्या होगा जो साल 2011 से दिल्ली में डिब्बों में बंद पड़ी हैं।
इस पूरी व्यवस्था की समीक्षा करने में वरिष्ठ वकील हरि प्रिया पद्मनाभन सहायता करेंगी।
न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ उस स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही थी, जो दिल्ली में सेंट्रल विस्टा योजना में सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी (CSL) के लिए कोई जगह आवंटित नहीं किए जाने की खबरों के बाद दर्ज किया गया था।
कोर्ट ने लाइब्रेरी के लिए जगह आवंटन पर उठाए सवाल
अदालत ने सवाल किया कि क्या नई बिल्डिंग में उन सभी किताबों के लिए वाकई पर्याप्त जगह मिल पाएगी? साथ ही, कॉन्फ्रेंस रूम जैसे अन्य निर्माण लाइब्रेरी की जगह को कैसे प्रभावित कर सकते हैं, इस पर भी कोर्ट ने स्पष्टीकरण मांगा है।
कोर्ट ने साफ तौर पर किताबों के कुल संग्रह (कलेक्शन साइज) और इस बड़े रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट में लाइब्रेरी के लिए आवंटित की जा रही जगह का सटीक ब्यौरा मांगा है।
यह स्वतः संज्ञान कार्रवाई द इंडियन एक्सप्रेस में 29 सितंबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट के बाद हुई। रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में शास्त्री भवन में स्थित CSL को सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास योजना के तहत भवन को गिराए जाने के प्रस्ताव के चलते दूसरी जगह स्थानांतरित किया जा सकता है। लाइब्रेरी के लिए उपयुक्त जगह उपलब्ध होने और इसके विशाल पुस्तक संग्रह को सुरक्षित रखने को लेकर चिंता जताई गई है।