दिल्ली की शिक्षण भर्तियों में 'पुरुष-महिला' की सीमा? सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर अधिकारों पर सरकार को फटकारा
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली में शिक्षण पदों के लिए निकलने वाले विज्ञापनों में सिर्फ 'पुरुष' या 'महिला' वर्ग का ही जिक्र होता है। इससे ट्रांसजेंडर लोग आवेदन ही नहीं कर पाते हैं। कोर्ट ने इसे ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 के प्रावधानों का उल्लंघन बताया है।
यह मामला जेन कौशिक नाम की एक ट्रांसजेंडर महिला ने उठाया था। उन्होंने कोर्ट में अपनी बात रखते हुए कहा कि सरकार ने नौकरी पोर्टल पर 'तीसरा लिंग' का विकल्प तो जोड़ दिया है, लेकिन यह काफी नहीं है। उनका कहना था कि जब तक नौकरियों के विज्ञापन 'पुरुष' या 'महिला' के लिए ही जारी होते रहेंगे, तब तक जेन जैसे ट्रांसजेंडर लोगों को मौका नहीं मिलेगा।
कोर्ट ने दिल्ली सरकार से ट्रांसजेंडर भर्ती पर जवाब मांगा
कोर्ट ने दिल्ली के अधिकारियों से पूछा कि वे ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों के लिए भर्ती प्रक्रिया को सही मायनों में समावेशी कैसे बनाएंगे? पीठ ने साफ कहा कि सिर्फ फॉर्म में बदलाव करना काफी नहीं है, असली बदलाव धरातल पर दिखना चाहिए।
वहीं, दिल्ली सरकार का कहना है कि अब कोई भी उनके पोर्टल पर पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) कर सकता है। हालांकि, सरकार ने यह भी माना कि अगर ट्रांसजेंडर लोगों को नौकरियों में आरक्षण जैसे बड़े बदलाव चाहिए, तो इसके लिए नए कानून बनाने पड़ेंगे।