सुप्रीम कोर्ट का कड़ा संदेश; किस्त नहीं भरने पर बैंकों को मानना होगा कानून, जबरदस्ती नहीं ले सकते गाड़ी
सुप्रीम कोर्ट ने बिल्कुल साफ कर दिया है कि अगर बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFCs) किसी ग्राहक के कर्ज चुकाने में चूक करने पर उसकी गाड़ी वापस लेना चाहें, तो उन्हें कानून का पूरी तरह पालन करना होगा।
न्यायालय ने वित्तीय कंपनियों के साथ भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को भी कहा कि वे सही नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। कोर्ट ने सभी को यह भी याद दिलाया कि कर्ज लेने वालों के भी कुछ अधिकार होते हैं।
कोर्ट ने चोलामंडलम को हर्जाना देने का आदेश दिया
चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी ने कानून के तहत जरूरी 7 दिन का नोटिस दिए बिना ही एक ट्रक को जब्त कर लिया था और इस दौरान बहुत ही कठोर तरीके अपनाए थे।
कोर्ट ने कंपनी के इस तरीके को गलत बताया और इससे जुड़े सभी लोन बंद करने का आदेश दिया। साथ ही निर्देश दिए कि कंपनी 4.5 लाख रुपये 6 प्रतिशत ब्याज के साथ वापस करे। इसके अलावा, मानसिक परेशानी और कमाई के नुकसान के लिए 10 लाख रुपये और मुकदमे के खर्च के तौर पर 50,000 रुपये भी चुकाए। यह फैसला एक बड़ा संदेश देता है कि कर्ज वसूली में नैतिकता और सही तरीका कितना अहम है।